India Budget 2026-27: आध्यात्मिक पर्यटन में बंपर निवेश, मंदिर और बौद्ध सर्किट होंगे हाई-टेक!

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
India Budget 2026-27: आध्यात्मिक पर्यटन में बंपर निवेश, मंदिर और बौद्ध सर्किट होंगे हाई-टेक!
Overview

भारत सरकार ने अपने बजट 2026-2027 में आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन को बड़ी सौगात दी है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और तीर्थयात्रा योजनाओं के लिए फंड आवंटन में बढ़ोतरी के साथ, सरकार मंदिर शहरों और बौद्ध सर्किट को हाई-टेक बनाने की तैयारी में है।

धार्मिक पर्यटन पर सरकार का फोकस

भारत सरकार ने इस बार अपने बजट 2026-2027 में आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन को खास तवज्जो दी है। सरकार का मानना है कि इन पवित्र स्थलों का आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है, और इसी को ध्यान में रखते हुए बजट में कई अहम ऐलान किए गए हैं। इन पहलों से न सिर्फ तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेगा और पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा।

तीर्थयात्राओं के लिए बढ़ाए गए फंड

सरकार की 'तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन ड्राइव' (PRASHAD) योजना के लिए इस फाइनेंशियल ईयर में ₹245 करोड़ का भारी आवंटन किया गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह राशि ₹132 करोड़ रिवाइज्ड थी, जो कि एक बड़ी बढ़ोतरी है। इसके अलावा, 'सिटी इकोनॉमिक रीजन्स' (CERs) को विकसित करने के लिए अगले पांच सालों में प्रति CER ₹5,000 करोड़ का फंड देने का प्रस्ताव है, जिससे इन शहरों का कायापलट हो सकेगा।

कनेक्टिविटी और नए सर्किट

सरकार ने देश भर में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है, जिन्हें 'ग्रोथ कनेक्टर' का नाम दिया गया है। इनमें दिल्ली-वाराणसी रूट भी शामिल है, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इतना ही नहीं, पूर्वोत्तर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में नए बौद्ध सर्किट भी विकसित किए जाएंगे। इन परिक्षेत्रों में मठों का संरक्षण, इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही, सारनाथ जैसे पंद्रह ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों को 'एक्सपीरियंशियल कल्चरल डेस्टिनेशन' के तौर पर विकसित किया जाएगा, जिससे नए टूरिस्ट सर्किट तैयार होंगे।

इंडस्ट्री की उम्मीदें:

इस बजट से इंडस्ट्री भी उत्साहित है। MakeMyTrip के को-फाउंडर राजेश मैगों का मानना है कि ऐतिहासिक शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर जोर देने से धार्मिक यात्राओं को काफी बढ़ावा मिलेगा। वहीं, HVS Anarock के प्रेसिडेंट मंदीप एस लंबा ने बताया कि धार्मिक स्थलों के आसपास हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में तेजी देखी जा रही है। पिछले साल लगभग 7,700 और 2024 में करीब 8,000 ब्रांडेड होटल कीज़ साइन हुईं, जो कुल साइ​निंग्स का एक अहम हिस्सा है। Lemon Tree Hotels और Radisson Hotel Group जैसी बड़ी होटल चेनें अयोध्या, हरिद्वार, शिरडी और वाराणसी जैसे शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।'

बाजार का नजरिया:

भारत का आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन बाजार पहले से ही काफी बड़ा है और इसके वित्त वर्ष 2032 तक 441.19 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी सालाना ग्रोथ रेट (CAGR) 10.2% है। वहीं, केवल आस्था-आधारित पर्यटन (Faith-based tourism) का सेगमेंट 2025 में 1,361.1 मिलियन डॉलर था और 2032 तक 3,689.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसका CAGR 15.3% है।

ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी MakeMyTrip की मार्केट कैप जनवरी 2026 तक 5.89 बिलियन डॉलर थी, जिसका P/E रेशियो 124.74 था। कंपनी ने Q3 FY26 में रेवेन्यू में 15.4% की बढ़ोतरी के बावजूद फाइनेंसियल कॉस्ट बढ़ने के कारण प्रॉफिट में 73% की गिरावट दर्ज की थी।

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में Lemon Tree Hotels, जिसकी मार्केट कैप फरवरी 2026 तक ₹10,144 करोड़ थी और TTM P/E रेशियो 36.82 था, वह भी वाराणसी में एक हेरिटेज होटल खोलने की योजना बना रहा है। कंपनी के एसेट-लाइट ऑपरेटर मॉडल को Warburg Pincus का भी समर्थन मिला है। ब्रोकरेज फर्म HSBC ने Lemon Tree Hotels पर 'Buy' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹179 रखा है।

सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार ध्यान देने और तीर्थयात्रा योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाने से भारत के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा में वृद्धि होने की उम्मीद है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.