निवेशकों की संख्या बढ़ी, पर शिकायतें घटीं
पिछले एक दशक में भारत के शेयर बाजार में इन्वेस्टर्स की संख्या में ज़बरदस्त उछाल आया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर क्लाइंट्स की संख्या 784% और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 998% तक बढ़ी है। इसके बावजूद, ब्रोकर्स के खिलाफ प्रति मिलियन इन्वेस्टर्स की शिकायतें काफी कम हुई हैं। यह दिखाता है कि बाजार की व्यवस्थाएं अब ज़्यादा मजबूत और असरदार हो गई हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं?
फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, NSE पर ब्रोकर्स के खिलाफ कुल 15,770 शिकायतें दर्ज हुईं, जो प्रति मिलियन इन्वेस्टर्स 340 बनती हैं। यह पिछले साल के 400 प्रति मिलियन के आंकड़े से बेहतर है। दस साल पहले, FY16 में, जब NSE पर क्लाइंट बेस 5.2 मिलियन था, तब प्रति मिलियन इन्वेस्टर्स 900 शिकायतें आती थीं। BSE का भी यही हाल है। FY16 में जहाँ BSE पर प्रति मिलियन 506 शिकायतें थीं, वहीं FY25 में क्लाइंट बेस 24 मिलियन तक पहुंचने के बावजूद यह संख्या घटकर केवल 34 प्रति मिलियन रह गई है।
टेक्नोलॉजी का बड़ा हाथ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सकारात्मक बदलाव के पीछे टेक्नोलॉजी का बड़ा योगदान है। पहले जहां फंड ट्रांसफर के लिए चेक और डॉक्यूमेंट्स के लिए फिजिकल डिलीवरी जैसी मैन्युअल प्रक्रियाएं थीं, वहीं अब डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर और ऑनलाइन कॉन्ट्रैक्ट नोट्स जैसी इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्थाएं आ गई हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स और मोबाइल ऐप्स के ज़रिए ट्रेडिंग की सुविधा ने मैन्युअल स्टेप्स को कम किया है, जिससे गलतियों और शिकायतों की गुंजाइश काफी घट गई है।
रेगुलेटर्स का कसा शिकंजा
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Sebi) जैसे रेगुलेटर्स ने भी निवेशकों को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ब्लॉक मैकेनिज्म, जिसमें इन्वेस्टर्स सीधे अपने अकाउंट में फंड ब्लॉक कर सकते हैं, ने काफी मदद की है। इस सिस्टम से न केवल फंड मैनेज करना आसान हुआ है, बल्कि गलत रिपोर्टिंग या फंड के गलत इस्तेमाल जैसे जोखिम भी कम हुए हैं, जिससे शिकायतों की संख्या में कमी आई है।
