आयकर विभाग का नया पोर्टल: विदेश में रखी संपत्ति का रखें पूरा हिसाब-किताब!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
आयकर विभाग का नया पोर्टल: विदेश में रखी संपत्ति का रखें पूरा हिसाब-किताब!

आयकर विभाग ने विदेशी संपत्ति की जानकारी (FAI) के लिए अपना नया पोर्टल लॉन्च कर दिया है। अब टैक्सपेयर्स अपनी विदेशी वित्तीय संपत्तियों का डेटा देख और वेरिफाई कर सकते हैं। इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और टैक्स रिटर्न भरने से पहले विदेशी आय का मिलान करने में मदद मिलेगी।

आयकर विभाग ने विदेशी संपत्ति की जानकारी (Foreign Assets Information - FAI) को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने अपना FAI पोर्टल लॉन्च किया है, जिसका मकसद टैक्सपेयर्स के लिए विदेशों में रखी उनकी वित्तीय संपत्तियों की जानकारी को सुव्यवस्थित करना है। यह पोर्टल टैक्सपेयर्स को अपनी विदेशी संपत्तियों का पूरा हिसाब-किताब रखने और उसे वेरिफाई करने में मदद करेगा।

FAI पोर्टल: अपनी विदेशी संपत्ति का डेटा कैसे देखें?

टैक्सपेयर्स अब इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करके FAI पोर्टल को एक्सेस कर सकते हैं। 'एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS)' टैब के तहत 'कंप्लायंस पोर्टल' पर जाकर 'रिपोर्ट्स' सेक्शन में 'Foreign Assets Information' का विकल्प चुनना होगा। इस पोर्टल पर कैलेंडर वर्ष 2022 से आगे का डेटा उपलब्ध है। यह रिपोर्ट पासवर्ड से सुरक्षित होती है और इसमें विदेशी बैंक खातों, ब्याज आय, डिविडेंड और अन्य वित्तीय भुगतानों की जानकारी होती है, जो विदेशी संस्थाओं द्वारा भारतीय अधिकारियों को दी गई है।

टैक्स कंप्लायंस के लिए वेरिफिकेशन क्यों जरूरी है?

यह सिस्टम, घरेलू वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करने वाले एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की तरह ही काम करता है। FAI पोर्टल का मुख्य उद्देश्य टैक्स फाइल करने से पहले ही वेरिफिकेशन का एक जरिया उपलब्ध कराना है। यदि टैक्सपेयर को विदेशी अधिकारियों द्वारा प्रदान किए गए डेटा में कोई गड़बड़ी मिलती है, तो वह सीधे पोर्टल के माध्यम से आवश्यक स्पष्टीकरण के साथ फीडबैक जमा कर सकता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत में रहने वाले निवासियों, विदेश से लौटे एनआरआई (NRI) और अप्रवासियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिनके पास विदेशी निवेश हैं। यह जानकारी 'ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन' (Automatic Exchange of Information) फ्रेमवर्क के तहत प्राप्त होती है। ऐसे में, फाइल किए गए टैक्स रिटर्न और आयकर विभाग के पास मौजूद जानकारी के बीच कोई भी बड़ा अंतर, कर अधिकारियों द्वारा अधिक गहन जांच को ट्रिगर कर सकता है।

शेड्यूल FA और AL के लिए कंप्लायंस की जरूरतें

निवेशकों के लिए यह जानना भी अहम है कि टैक्स फाइलिंग में विभिन्न रिपोर्टिंग शेड्यूल के बीच अंतर को समझना जरूरी है। टैक्सपेयर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी संपत्तियां शेड्यूल FA में और जहाँ लागू हो, शेड्यूल AL में ठीक से घोषित की गई हों। केवल एक शेड्यूल में संपत्ति की रिपोर्टिंग करना दूसरे के लिए डिस्क्लोजर की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन डिस्क्लोजर्स को सटीकता से संभाला जाना चाहिए। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी व्यक्तिगत निवेश रिकॉर्ड को FAI रिपोर्ट से क्रॉस-चेक करें ताकि निरंतरता सुनिश्चित हो सके। टैक्सपेयर्स के लिए अगला तत्काल कदम रिपोर्ट डाउनलोड करना, अपने वित्तीय विवरणों के साथ जानकारी को सत्यापित करना और किसी भी विसंगति से बचने के लिए आवश्यक फीडबैक या सुधार जमा करना है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.