ITR Filing 2026: कैपिटल गेन्स के नए नियम और डेटा मिसमैच से कैसे निपटें?

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AuthorNeha Patil|Published at:
ITR Filing 2026: कैपिटल गेन्स के नए नियम और डेटा मिसमैच से कैसे निपटें?

टैक्सपेयर्स को इस बार ITR फाइलिंग में प्रॉपर्टी पर नए कैपिटल गेन्स नियमों और टैक्स स्टेटमेंट में लगातार डेटा मिसमैच की वजह से परेशानी हो रही है। टैक्स डिपार्टमेंट की जांच से बचने के लिए अपनी वित्तीय रिकॉर्ड को ठीक से मिलाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि प्री-फिल्ड जानकारी में भी गलतियां हो सकती हैं।

Detailed Coverage

कैपिटल गेन्स के नए नियमों का असर

प्रॉपर्टी बेचने वालों के लिए टैक्स का हिसाब-किताब एक बड़ी उलझन बन गया है। जो टैक्सपेयर्स 23 जुलाई, 2024 से पहले प्रॉपर्टी खरीदे थे और उसे बेच रहे हैं, उन्हें अब नए 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स रेट (बिना इंडेक्सेशन के) और पुराने 20% रेट (इंडेक्सेशन के साथ) में से सबसे फायदेमंद विकल्प चुनना होगा। सही टैक्स देनदारी की गणना के लिए खरीद की लागत, सुधार की लागत और महंगाई के हिसाब से एडजस्टमेंट का सटीक हिसाब लगाना ज़रूरी है। इन आंकड़ों की गलत गणना या टैक्स फाइलिंग सॉफ्टवेयर में सरचार्ज का गलत इस्तेमाल आपको टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस का शिकार बना सकता है।

डेटा मिसमैच को कैसे सुलझाएं?

प्रॉपर्टी टैक्स नियमों से परे, टैक्सपेयर्स को अपने अकाउंट्स और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दिख रहे डेटा के बीच लगातार मिसमैच का सामना करना पड़ रहा है। ये अंतर अक्सर थर्ड-पार्टी रिपोर्टिंग एंटिटीज़ द्वारा दी गई अधूरी ट्रांजेक्शन डिटेल्स की वजह से होते हैं। ऐसे में, प्री-फिल्ड जानकारी पर आँख बंद करके भरोसा करना एक बड़ा रिस्क है। टैक्स फाइल करने से पहले हर एंट्री को अपने बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप और इन्वेस्टमेंट रिकॉर्ड से मिलाना चाहिए। यह मैन्युअल वेरिफिकेशन ही टैक्स अथॉरिटीज़ से सवाल-जवाब या स्पष्टीकरण मांगने की स्थिति से बचने का सबसे कारगर तरीका है।

कंप्लायंस और पोर्टल की चुनौतियाँ

जिन लोगों के पास अलग-अलग तरह के पोर्टफोलियो हैं, उनके लिए सही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म चुनना एक अहम कदम है। आम गलतियों में अयोग्य डिडक्शन का दावा करना, रेंटल इनकम पर कटे टैक्स की गलत रिपोर्टिंग करना, या विदेशी निवेश या विदेशी बैंक खातों जैसी ज़रूरी जानकारी का खुलासा न करना शामिल है। फाइलिंग की डेडलाइन नजदीक आने के साथ, यूज़र्स को ई-फाइलिंग पोर्टल पर संभावित तकनीकी दिक्कतों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। स्लो लोडिंग टाइम, वैलिडेशन एरर या ई-वेरिफिकेशन प्रोसेस में गड़बड़ी फाइलिंग के अनुभव को बाधित कर सकती है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि जल्दी फाइलिंग करने और पीक आवर्स के बाहर पोर्टल का इस्तेमाल करने से इन तकनीकी जोखिमों को कम किया जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वर्तमान असेसमेंट ईयर के लिए आपके दस्तावेज़ पूरे और सटीक हों।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.