ITR-3 का नया नियम: F&O कारोबारियों के लिए बड़ी खबर, अब देना होगा अलग से ब्यौरा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
ITR-3 का नया नियम: F&O कारोबारियों के लिए बड़ी खबर, अब देना होगा अलग से ब्यौरा!

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-3 फॉर्म में बड़ा बदलाव किया है। अब फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) कारोबारियों को अपने F&O टर्नओवर (Turnover) और इनकम (Income) की जानकारी अलग से देनी होगी। यह जानकारी ब्रोकर के रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए, वरना रिटर्न डिफेक्टिव (Defective) हो सकता है।

क्या है नया नियम?

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-3 फॉर्म में ज़रूरी बदलावों का ऐलान किया है। अब जो टैक्सपेयर्स (Taxpayers) फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करते हैं, उन्हें अपने F&O टर्नओवर और इनकम की जानकारी अलग से देनी होगी। इससे पहले, यह जानकारी अक्सर अन्य बिज़नेस रिसिप्ट्स (Business Receipts) के साथ मिला दी जाती थी। ट्रेडिंग अकाउंट शेड्यूल (Trading Account Schedule) में इस नए स्ट्रक्चर (Structure) के तहत F&O, इंट्राडे इक्विटी (Intraday Equity), कमोडिटी (Commodity) और करेंसी (Currency) के लिए अलग से खुलासे की मांग की गई है, ताकि पारदर्शिता बढ़ाई जा सके और डेटा वेरिफिकेशन (Data Verification) को आसान बनाया जा सके।

ट्रेडर्स के लिए क्यों है ज़रूरी?

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पिछले कुछ सालों में डेरिवेटिव्स मार्केट (Derivatives Market) में रिटेल पार्टिसिपेशन (Retail Participation) में काफी बढ़ोतरी हुई है। स्पेसिफिक डिस्क्लोजर (Specific Disclosure) की मांग करके, टैक्स विभाग का लक्ष्य टैक्सपेयर्स की फाइलिंग को एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और ब्रोकर रिकॉर्ड्स (Broker Records) में उपलब्ध डेटा से मिलाना है। जब कोई टैक्सपेयर ITR-3 फाइल करता है, तो इन नए फील्ड्स (Fields) के डेटा का इस्तेमाल इनकम के क्लासिफिकेशन (Classification) और लॉस ऑफ-सेट क्लेम्स (Loss Set-off Claims) की वैधता को वेरिफाई करने के लिए किया जाएगा। इन अनिवार्य फील्ड्स में अधूरी या खाली जानकारी देना अब कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि सिस्टम फाइलिंग प्रोसेस को रिजेक्ट (Reject) कर सकता है या रिटर्न को नॉन-कम्प्लायंस (Non-compliance) के लिए फ्लैग (Flag) कर सकता है।

डिफेक्टिव रिटर्न का खतरा

अगर ज़रूरी F&O टर्नओवर और इनकम की जानकारी गायब है या ऑफिशियल रिकॉर्ड्स से मेल नहीं खाती है, तो आयकर अधिनियम की धारा 139(9) के तहत टैक्स रिटर्न को डिफेक्टिव माना जा सकता है। एक डिफेक्टिव रिटर्न वह है जिसे टैक्स डिपार्टमेंट स्वीकार नहीं करता है क्योंकि उसमें ज़रूरी जानकारी का अभाव होता है। यदि किसी टैक्सपेयर को डिफेक्टिव रिटर्न के लिए नोटिस मिलता है, तो उन्हें एक तय समय-सीमा के भीतर गलतियों को सुधारना होगा। ऐसा न करने पर रिटर्न को अमान्य घोषित किया जा सकता है, जिसमें पेनल्टी (Penalty) लगने और नॉन-स्पेकुलेटिव बिज़नेस लॉसेस (Non-speculative Business Losses) को भविष्य के लिए कैरी-फॉरवर्ड (Carry-forward) करने के अधिकार को खोने का खतरा शामिल है।

F&O बनाम स्पेकुलेटिव इनकम को समझना

टैक्स के नज़रिए से, F&O ट्रेडिंग और अन्य एक्टिविटीज़ (Activities) के बीच अंतर करना बहुत महत्वपूर्ण है। F&O इनकम को आम तौर पर नॉन-स्पेकुलेटिव बिज़नेस इनकम (Non-speculative Business Income) के रूप में क्लासिफाई किया जाता है। यह क्लासिफिकेशन ट्रेडर्स को लॉसेस को अन्य बिज़नेस इनकम (सैलरी को छोड़कर) के अगेंस्ट सेट-ऑफ (Set-off) करने और अनएब्जॉर्ब्ड लॉसेस (Unabsorbed Losses) को आठ असेसमेंट इयर्स तक कैरी-फॉरवर्ड करने की अनुमति देता है।

इसके विपरीत, इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग को स्पेकुलेटिव बिज़नेस एक्टिविटी (Speculative Business Activity) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। स्पेकुलेटिव ट्रेड से होने वाले लॉसेस को केवल अन्य स्पेकुलेटिव बिज़नेस से होने वाले प्रॉफिट के अगेंस्ट ही सेट-ऑफ किया जा सकता है और इन्हें केवल चार असेसमेंट इयर्स तक ही कैरी-फॉरवर्ड किया जा सकता है। चूंकि इन दोनों कैटेगरीज़ के बीच टैक्स ट्रीटमेंट (Tax Treatment) और कैरी-फॉरवर्ड पीरियड (Carry-forward Periods) में काफी अंतर है, इसलिए टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा अलग से रिपोर्टिंग पर जोर देना इन दोनों प्रकार की इनकम को गलत तरीके से मिलाने से रोकने के लिए है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

ट्रेडर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके टर्नओवर की गणना टैक्स अथॉरिटीज (Tax Authorities) द्वारा आवश्यक मेथोडोलॉजी (Methodology) के अनुसार हो और यह उनके स्टॉक ब्रोकर्स (Stock Brokers) द्वारा दी गई जानकारी से मेल खाती हो। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-3 फाइल करने से पहले, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट्स (Tax Audit Reports), यदि लागू हो, के साथ फिगर (Figures) को क्रॉस-वेरिफाई (Cross-verify) करना महत्वपूर्ण है। पूरे साल सटीक रिकॉर्ड बनाए रखने से आखिरी समय में रिवीजन (Revision) की ज़रूरत से बचने में मदद मिल सकती है और लॉसेस को कैरी-फॉरवर्ड करने के अधिकार को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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