बेंगलुरु ITAT ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब कर्मचारियों को मिलने वाले ESOP (Employee Stock Options) के रीपरचेज (Buyback) से हुई कमाई को सैलरी इनकम नहीं, बल्कि कैपिटल गेन माना जाएगा। इससे कर्मचारियों को बड़ी टैक्स राहत मिल सकती है।
ITAT का बड़ा ऐलान: ESOP पर टैक्स का नया नियम!
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) बेंगलुरु ने 30 जुलाई 2026 को एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि अगर कोई कंपनी अपने कर्मचारियों से वेस्टेड ESOPs को ऑप्शन्स एक्सरसाइज करने से पहले ही खरीद लेती है, तो उस पर मिलने वाली रकम को सैलरी इनकम नहीं, बल्कि कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में रखा जाएगा।
स्टार्टअप कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी
यह फैसला खासकर स्टार्टअप्स और उन कंपनियों के कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है, जहां ESOPs को कंपनसेशन पैकेज का अहम हिस्सा माना जाता है। मौजूदा टैक्स नियमों के तहत, सैलरी इनकम पर 30% या उससे भी ज्यादा टैक्स लग सकता है, जबकि लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स की दरें काफी कम होती हैं। इस फैसले से कर्मचारियों की टैक्स देनदारी में भारी कमी आ सकती है।
Flipkart के पूर्व एग्जीक्यूटिव का केस
ITAT का यह फैसला ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart के एक पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव, प्रमोद कुमार जैन के मामले में आया। Flipkart ने उनसे 2,653 वेस्टेड स्टॉक ऑप्शन्स वापस खरीदे थे, जिसके लिए उन्हें लगभग ₹2.33 करोड़ मिले थे। श्री जैन ने इसे अपनी टैक्स रिटर्न में कैपिटल गेन के तौर पर दिखाया था, लेकिन टैक्स डिपार्टमेंट का तर्क था कि यह सैलरी परक्विजिट (Salary Perquisite) के तहत टैक्सेबल होना चाहिए।
ITAT ने टैक्स डिपार्टमेंट के तर्क को किया खारिज
ITAT बेंच ने टैक्स डिपार्टमेंट के तर्क से असहमति जताते हुए कहा कि सेक्शन 17(2)(vi) तभी लागू होता है जब कर्मचारी अपने ऑप्शन्स को एक्सरसाइज करके कंपनी के शेयर हासिल करता है। चूंकि श्री जैन ने ऑप्शन्स एक्सरसाइज नहीं किए थे और उन्हें कोई शेयर अलॉट नहीं हुआ था, इसलिए ITAT ने माना कि इन ऑप्शन्स को 'स्पेसिफाइड सिक्योरिटीज' नहीं माना जा सकता। इसके बजाय, ITAT ने इन अन-एक्सरसाइज्ड ऑप्शन्स को कैपिटल एसेट्स (Capital Assets) माना, जिससे यह ट्रांजैक्शन कैपिटल गेन के तहत आया।
आगे क्या?
हालांकि यह फैसला एक सकारात्मक नज़ीर पेश करता है, लेकिन टैक्स के मामले हमेशा पेचीदा होते हैं। यह भी संभव है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस फैसले को उच्च न्यायालयों में चुनौती दे। जिन कर्मचारियों ने पहले ऐसी कमाई को सैलरी इनकम के तौर पर दिखाया है, वे चाहें तो सुधार (Rectification) या रिफंड के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए प्रोफेशनल टैक्स एडवाइस लेना ज़रूरी होगा। भविष्य में, टैक्स अथॉरिटीज इस नियम की व्याख्या कैसे करती हैं, इस पर सभी की नज़रें रहेंगी।
