ISRO ने अब स्पेस सेक्टर में कमर्शियल क्रांति लाने की तैयारी कर ली है। एजेंसी ने 2040 तक चांद पर मानव मिशन और 2035 तक अपना परमानेंट स्पेस स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा है, जो भारत को ग्लोबल सैटेलाइट मार्केट का लीडर बनाने की ओर एक बड़ा कदम है।
स्पेस सेक्टर में भारत का बड़ा दांव
ISRO अब सिर्फ प्रयोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्पेस सेक्टर को एक इंडस्ट्री की तरह विकसित करने की तैयारी में है। ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने स्पष्ट किया है कि भारत का लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर मानव उतारने का है। यह सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि भारत को ग्लोबल स्पेस लीडर बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' की तैयारी
इस रोडमैप का सबसे मुख्य केंद्र 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (Bharatiya Antariksh Station) है। इसके पहले मॉड्यूल को मंजूरी मिल चुकी है और उम्मीद है कि 2035 तक यह पूरी तरह काम करने लगेगा। इसके साथ ही, गगनयान कार्यक्रम के जरिए एजेंसी अंतरिक्ष में मानव के लंबे प्रवास की क्षमताओं को विकसित कर रही है, जिसमें एडवांस्ड लाइफ-सपोर्ट सिस्टम शामिल है।
कमर्शियल लॉन्च में बड़ी पहल
इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि ISRO अब पूरी तरह कमर्शियल मोड में शिफ्ट हो रहा है। एजेंसी एक ऐसा नेक्स्ट-जेनरेशन लॉन्च व्हीकल बना रही है जो 30,000 किलो तक का भार लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में ले जाने में सक्षम होगा। इसका सीधा असर 'विकसित भारत' के औद्योगिक लक्ष्यों पर पड़ेगा, जिससे प्राइवेट सेक्टर के लिए मैन्युफैक्चरिंग और पार्ट्स सप्लाई के नए अवसर पैदा होंगे।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में जोखिम भी हैं, क्योंकि इनका पूरा दारोमदार कॉम्प्लेक्स इंजीनियरिंग और भारी कैपिटल पर है। प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप इस सेक्टर की ग्रोथ का इंजन साबित हो सकती है। आने वाले समय में चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) की प्रोग्रेस और हेवी-लिफ्ट व्हीकल्स का डेवलपमेंट ही यह तय करेगा कि भारत अपने इन एंबिशियस डेडलाइंस को कितना समय पर पूरा कर पाता है।
