ISRO: NVS-03 मिशन की सफलता के लिए बड़ा बदलाव, डिजाइन में बदलाव पर चल रहा विचार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ISRO: NVS-03 मिशन की सफलता के लिए बड़ा बदलाव, डिजाइन में बदलाव पर चल रहा विचार

ISRO अपने अपकमिंग नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 के लिए एक अहम वॉल्व कॉन्फ़िगरेशन की समीक्षा कर रहा है। पिछले मिशन की नाकामी के बाद, यह फैसला भारत के NavIC सिस्टम की रेडंडेंसी को बहाल करने के लिए बेहद जरूरी है।

ISRO इस समय अपने आगामी नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 के लिए एक हाई-स्टेक टेक्निकल रिव्यू में जुटा है। NVS-02 मिशन के अपनी तय कक्षा (Orbit) तक न पहुंच पाने के बाद, वैज्ञानिक अब स्पेसक्राफ्ट के प्रोपल्शन सिस्टम पर फिर से काम कर रहे हैं। चर्चा का मुख्य केंद्र 'ऑक्सिडाइज़र-लाइन पाइरो वॉल्व' (oxidiser-line pyro valve) है। पिछले मिशन के दौरान, एक सिग्नल संबंधी दिक्कत के कारण यह वॉल्व सक्रिय नहीं हो पाया था, जो मिशन की विफलता की बड़ी वजह बनी।\n\n### क्या है नया प्लान?\n\nइंजीनियर्स अब NVS-03 को इस वॉल्व को पहले से ही 'ओपन' रखकर लॉन्च करने पर विचार कर रहे हैं। इससे यह खतरा खत्म हो जाएगा कि स्पेस में वॉल्व समय पर न खुले। हालांकि, इसके साथ ही एक और चुनौती जुड़ी है—दबाव अब 'डाउनस्ट्रीम लैच वॉल्व' पर आ जाएगा। अगर यह कंपोनेंट लॉन्च के दौरान होने वाले वाइब्रेशन और दबाव को नहीं झेल पाया, तो सिस्टम लीक हो सकता है। फिलहाल ISRO की टीम इन दोनों ही स्थितियों के नफा-नुकसान को तौल रही है।\n\n### NavIC के लिए क्यों है यह जरूरी?\n\nभारत का NavIC सिस्टम फिलहाल केवल 3 सक्रिय सैटेलाइट्स के साथ काम कर रहा है, जबकि बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए कम से कम 4 सैटेलाइट्स का होना अनिवार्य है। NVS-03 मिशन इस कॉन्स्टेलेशन को स्थिर करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।\n\nआने वाले समय में NVS-04 और NVS-05 जैसे सैटेलाइट्स भी लॉन्च किए जाएंगे, जो L1 बैंड सपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं देंगे। ISRO का यह निर्णय सिर्फ एक सैटेलाइट लॉन्च तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के नेविगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की भविष्य की मजबूती के लिए एक निर्णायक कदम है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.