IRDAI का बड़ा कदम: 2027 से हर इंश्योरेंस पॉलिसी पर होगा 'डिजिटल सेलर टैग', ऐसे बदलेगा नियम

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
IRDAI का बड़ा कदम: 2027 से हर इंश्योरेंस पॉलिसी पर होगा 'डिजिटल सेलर टैग', ऐसे बदलेगा नियम

1 जनवरी 2027 से, IRDAI सभी इंश्योरेंस पॉलिसी को बेचने वाले सेल्सपर्सन से डिजिटली जोड़ेगा। इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन क्या यह गलत बिक्री को पूरी तरह रोकेगा? यह 'सबका बीमा सबकी रक्षा' एक्ट का हिस्सा है।

IRDAI का नया नियम: अब हर पॉलिसी का होगा डिजिटल सेलर

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेगुलेटर ने 'इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज (अमेंडमेंट) रेगुलेशन, 2026' जारी किया है। इसके तहत, 1 जनवरी 2027 से देश में जारी होने वाली हर इंश्योरेंस पॉलिसी को उस एजेंट, सेल्सपर्सन या पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) व्यक्ति से डिजिटली टैग किया जाएगा, जिसने पॉलिसी बेची है। यह बदलाव 'सबका बीमा, सबकी रक्षा (इंश्योरेंस कानून संशोधन) एक्ट, 2025' के तहत हो रहा है।

कौन है जिम्मेदार? अब साफ होगी पहचान

इस नियम का मुख्य मकसद यह है कि पॉलिसी खरीदने वाले ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि उन्हें प्रोडक्ट किसने बेचा है। अक्सर यह पता लगाना मुश्किल होता है कि समस्या किसी एजेंट की गलत सलाह से हुई है या कंपनी के प्रोडक्ट डिजाइन से। इस टैगिंग से रेगुलेटर को ऐसी बिक्री रोकने की उम्मीद है, जहां ग्राहक की जरूरत से ज्यादा जल्दी बिक्री पर फोकस किया जाता है। यह नियम ब्रोकर्स, कॉर्पोरेट एजेंट्स और वेब एग्रीगेटर्स जैसे सभी तरह के इंटरमीडियरीज पर लागू होगा।

क्या कमीशन का लालच रुकेगा?

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेल्सपर्सन की पहचान जरूरी है, लेकिन यह गलत बिक्री के मूल कारण को ठीक नहीं करता। चिंता यह है कि मौजूदा कमीशन-आधारित इंसेंटिव स्ट्रक्चर एजेंट्स को ऐसे प्रोडक्ट्स बेचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जो ग्राहक के लिए शायद सही न हों। ऐसे में, अगर पहचान तो हो जाती है, लेकिन ऊंची बिक्री पर इनाम का सिस्टम वैसे ही बना रहता है, तो गलत प्रोडक्ट की सिफारिशों का जोखिम बना रह सकता है।

कंपनियों पर असर और आगे क्या?

इंश्योरेंस कंपनियों और इंटरमीडियरीज को जनवरी 2027 की समय सीमा तक अपने डिजिटल सिस्टम को अपडेट करना होगा। नियमों का पालन न करने पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लग सकता है। निवेशकों के लिए, यह दिखाता है कि रेगुलेटर अपनी निगरानी बढ़ा रहा है। हालांकि, इस नियम की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कंपनियां अपने सेल्स इंसेंटिव मॉडल में भी बदलाव करती हैं। तब तक, ग्राहकों के लिए खुद रिसर्च करना और पॉलिसी के फायदों को वेरिफाई करना ही सबसे बड़ा बचाव है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.