IRCTC ने रेलवे ज़ोन में की ताबड़तोड़ छापेमारी, 8,300 से ज़्यादा गैर-मंजूर खाने-पीने के सामान ज़ब्त किए। इस कदम से सुरक्षा मानक तो सुधरेंगे, लेकिन निवेशकों की नज़र कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर रहेगी, जो पहले से ही लागत बढ़ने से दबाव में है।
IRCTC की सख्त कार्रवाई: कैटरिंग में दिखी बड़ी गड़बड़ी!
रेलवे यात्रियों को मिलने वाले खान-पान की क्वालिटी को लेकर अब IRCTC और भी सख्त हो गया है। कंपनी ने हाल ही में पूरे देश भर में कई रेलवे ज़ोन्स में ताबड़तोड़ छापेमारी कर 8,349 बोतलें गैर-मंजूर पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर के साथ-साथ आइसक्रीम और फ्लेवर्ड मिल्क जैसे दूसरे प्रोडक्ट्स भी ज़ब्त किए हैं। ये कार्रवाई 28 जुलाई से 14 अगस्त 2026 के बीच की गई है।
क्वालिटी कंट्रोल पर कंपनी का फोकस
IRCTC की क्विक रिस्पांस टीमों (QRTs) ने लखनऊ, चंडीगढ़, अम्बाला, साबरमती और हावड़ा जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर ये चेकिंग की। कंपनी ने कैटरिंग सर्विस प्रोवाइडर्स को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने गैर-मंजूर प्रोडक्ट्स बेचे तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
IRCTC के लिए कैटरिंग बिज़नेस काफी अहम है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी ने ₹1,370 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था, जो पिछले साल से 18.1% ज़्यादा है। हालांकि, कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ा है, जिसमें एम्प्लॉई कॉस्ट और महंगाई का असर दिख रहा है।
कैटरिंग बिज़नेस में क्वालिटी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। IRCTC यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ इन निगरानी कार्यक्रमों पर आने वाले खर्च को भी कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। सप्लाई चेन में गड़बड़ी न हो और यात्रियों को दिक्कत न हो, इसके लिए कंपनी को नए और मंज़ूर वेंडर्स की व्यवस्था करनी होगी।
आगे क्या?
निवेशकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि IRCTC कैसे इन सख्त नियमों को लागू करते हुए अपने ऑपरेटिंग खर्चों को कंट्रोल में रखती है। भविष्य की रिपोर्ट्स से पता चलेगा कि इस कार्रवाई का कंपनी के मुनाफे पर क्या असर पड़ता है।
