IPCC का 65वां सत्र बेनतीजा: क्लाइमेट रिपोर्ट की समयसीमा पर टला फैसला

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AuthorNeha Patil|Published at:
IPCC का 65वां सत्र बेनतीजा: क्लाइमेट रिपोर्ट की समयसीमा पर टला फैसला

इथियोपिया में आयोजित IPCC की 65वीं प्लेनरी बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। 2024 के बाद से यह छठी बार है जब संस्था अपनी सातवीं असेसमेंट रिपोर्ट (AR7) की समयसीमा तय करने में विफल रही है, जिससे ग्लोबल क्लाइमेट पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

अदीस अबाबा में आयोजित IPCC की बैठक चेयरमैन Jim Skea द्वारा 16 अक्टूबर को स्थगित कर दी गई। यह लगातार छठा मौका है जब सदस्य देश सातवीं असेसमेंट साइकिल के लिए एक साझा टाइमलाइन पर सहमति नहीं बना सके।

विवाद की मुख्य वजह

विवाद दो गुटों के बीच है। एक तरफ 'लीस्ट डेवलप्ड कंट्रीज' (LDC) का समूह है, जो जल्द रिपोर्ट चाहता है ताकि 2028 के 'ग्लोबल स्टॉकटेक' और 'पेरिस एग्रीमेंट' के लक्ष्यों को सही ढंग से आकार दिया जा सके। दूसरी तरफ भारत, सऊदी अरब और रूस जैसे देशों का ब्लॉक है, जो प्रक्रिया को अधिक संतुलित और समावेशी बनाने की वकालत कर रहा है।

भारत का स्पष्ट मानना है कि प्रस्तावित समयसीमा पिछली बार की तुलना में बहुत अधिक दबाव वाली है, जो वैज्ञानिक गुणवत्ता और समावेशिता पर असर डाल सकती है। भारत की मांग है कि जलवायु वैज्ञानिक प्रक्रियाओं में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और क्लाइमेट फाइनेंस जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

निवेशकों के लिए जोखिम

यह डेडलॉक केवल एक अकादमिक बहस नहीं है। ये रिपोर्टें ग्लोबल कार्बन एमिशन लक्ष्य, एनर्जी ट्रांजिशन और औद्योगिक रेगुलेशन का आधार तय करती हैं। जब तक रिपोर्ट की समयसीमा स्पष्ट नहीं होगी, मैन्युफैक्चरिंग, यूटिलिटीज और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों की कंपनियों के लिए भविष्य के अनुपालन (compliance) नियम और कैपिटल स्पेंडिंग की योजना बनाना मुश्किल बना रहेगा।

अगले कदम के रूप में, IPCC को अब एक बार फिर बजट और प्रकाशन शेड्यूल पर आम सहमति बनाने के लिए सदस्य देशों को साथ लाना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.