INDIA ब्लॉक ने इलेक्शन कमीशन (Election Commission) की चुनावी रोल रिवीजन प्रक्रिया के खिलाफ 5 नवंबर, 2026 को बेंगलुरु में एक बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। दिल्ली के बाद अब यह मुहिम देश भर में फैल रही है, जिस पर मार्केट जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है।
विपक्ष का गठबंधन INDIA ब्लॉक अब सड़क पर उतर आया है। 5 नवंबर, 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया है। यह प्रदर्शन इलेक्शन कमीशन द्वारा चलाई जा रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' प्रक्रिया के विरोध में है। इससे पहले 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में भी इसी तरह का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था।
प्रमुख मांगें और आरोप
कांग्रेस और CPI(M) समेत तमाम विपक्षी दलों ने चुनावी रोल में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया है। गठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम कट सकते हैं और संवैधानिक संस्थाओं पर अनुचित दबाव डाला जा रहा है। विपक्षी नेता चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बड़े बदलाव चाहते हैं।
बाजार पर असर (Market Impact)
बेंगलुरु जैसे कमर्शियल हब में हो रहे इस तरह के बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों को कॉर्पोरेट जगत भी गंभीरता से देख रहा है। हालांकि शेयर बाजार आमतौर पर इन राजनीतिक शोर-शराबे से इतर मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा और कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर ध्यान देता है, लेकिन इस तरह के तनाव से रेगुलेटरी माहौल में अनिश्चितता का डर बना रहता है। निवेशकों को चिंता है कि अगर यह सियासी रस्साकशी बढ़ती है, तो नीतिगत फैसलों में देरी हो सकती है। अब बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि इन प्रदर्शनों में कितनी भीड़ जुटती है और सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।
