मौसम विभाग (IMD) ने अगले छह दिनों तक पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, देश के दक्षिणी हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा।
पूर्वी भारत में भारी बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों के लिए मौसम की चेतावनी जारी की है। एक कमजोर पड़ते लो-प्रेशर सिस्टम के कारण, अगले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और ओडिशा जैसे राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। इन इलाकों को ऑरेंज अलर्ट पर रखा गया है, जहां 115.6 से 204.4 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है।
कृषि और इंफ्रा पर क्या होगा असर?
इस मौसम का कृषि क्षेत्र पर खास असर पड़ सकता है, खासकर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में। किसानों को सलाह दी गई है कि वे जलभराव से बचने के लिए अपने खेतों में जल निकासी की व्यवस्था ठीक रखें। केले और पपीते जैसी फसलों की कटाई की गुणवत्ता और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और पश्चिमी विक्षोभ के मेल से भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। इससे इन पहाड़ी इलाकों में परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में रुकावट आ सकती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मौसम
जहां पूर्वी भारत में ज्यादा बारिश की चेतावनी है, वहीं दूसरे हिस्सों में अलग तरह की समस्याएं हैं। दिल्ली और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश के बावजूद उमस और गर्मी बनी हुई है, तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। दूसरी ओर, दक्षिणी राज्यों जैसे तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। पूर्व में भारी बारिश और दक्षिण में अत्यधिक गर्मी का यह विरोधाभास उन कंपनियों के लिए परिचालन संबंधी चुनौतियां खड़ी करता है जिनके पास पूरे भारत में वितरण नेटवर्क या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट हैं।
सुरक्षा और आगे की निगरानी
समुद्री क्षेत्र पर भी असर पड़ रहा है, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है, जिससे क्षेत्रीय समुद्री भोजन सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। व्यापारियों और निवेशकों के लिए, अगले छह दिनों में वास्तविक बारिश का वितरण और पहाड़ी राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिरता पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। भारी बारिश के कारण प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी फैक्ट्री शटडाउन या लॉजिस्टिक्स में देरी हो सकती है।
