IIT Madras का नया कदम: UDYOG प्रोग्राम से दूर होगा बायोटेक सेक्टर में टैलेंट का संकट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IIT Madras का नया कदम: UDYOG प्रोग्राम से दूर होगा बायोटेक सेक्टर में टैलेंट का संकट

IIT Madras ने बायोटेक इंडस्ट्री और शिक्षा के बीच की दूरी को खत्म करने के लिए UDYOG प्रोग्राम लॉन्च किया है। इसका मकसद छात्रों को लैब वर्क और इंटर्नशिप के जरिए बायो-मैन्युफैक्चरिंग के लिए तैयार करना है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने 'Upskilling and Development for Young Graduates' यानी UDYOG प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्लासरूम की थ्योरी और भारत के तेजी से बढ़ते बायोटेक व बायो-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की जरूरतों के बीच तालमेल बिठाना है।

व्यावहारिक ट्रेनिंग का स्ट्रक्चर

यह प्रोग्राम 'SynBioME' के माध्यम से संचालित किया जाएगा, जो संस्थान और TICEL के बीच एक सहयोगी बायो-फाउंड्री है। पारंपरिक कोर्सेज के विपरीत, UDYOG एक हाइब्रिड मॉडल पर काम करता है। इसमें गहन लैबोरेटरी ट्रेनिंग, पायलट-स्केल प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्री इंटर्नशिप शामिल है। इसका लक्ष्य छात्रों को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग माहौल के लिए जरूरी बारीकियां और तकनीकी स्किल्स सिखाना है।

इंडस्ट्री के लिए क्यों है यह जरूरी?

भारत में बायोटेक और फार्मा सेक्टर अब बायोसिमिलर, ड्रग डिस्कवरी और जटिल मैन्युफैक्चरिंग पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसे प्रोफेशनल्स की कमी है, जिन्हें आधुनिक बायोप्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी का ज्ञान हो। UDYOG इस टैलेंट बॉटलनेक (Talent Bottleneck) को दूर करने का एक बड़ा जरिया बन सकता है।

प्रमुख जानकारियां

लॉन्च के दौरान IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी ने शैक्षणिक संस्थानों और प्राइवेट सेक्टर के बीच मजबूत तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। यह प्रोग्राम B.Tech, M.Tech और M.Sc बायोटेक के छात्रों के लिए खुला है।

  • ट्रेनिंग शुरू होने की तारीख: 18 जनवरी, 2027
  • अर्ली-बर्ड रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख: 15 दिसंबर, 2026
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.