हथकरघा हैकाथॉन 2.0 के सफल समापन के बाद, IIT दिल्ली अगले हफ्ते एक 'हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र' (Centre of Excellence for Handloom Technology) का उद्घाटन करने जा रहा है। इस नई सुविधा का लक्ष्य संस्थागत अनुसंधान और तकनीकी एकीकरण के माध्यम से बुनाई की प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना और बुनकरों की आजीविका में सुधार करना है।
शोध के ज़रिए हथकरघा को बढ़ावा
IIT दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Foundation for Innovation and Technology Transfer) ने हाल ही में कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) के सहयोग से 'हथकरघा हैकाथॉन 2.0' का आयोजन किया था। इस प्रतियोगिता में 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 100 फाइनलिस्ट टीमों ने अपने समाधान प्रस्तुत किए। इन समाधानों में बुनकरों के वित्तीय समावेशन के लिए AI-संचालित प्लेटफॉर्म, पर्यावरण-अनुकूल रंगाई प्रणालियाँ और करघा आधुनिकीकरण तकनीकें शामिल थीं।
इस हैकाथॉन से मिली प्रेरणा के साथ, संस्थान अगले हफ्ते 'हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र' का उद्घाटन करेगा। यह केंद्र एक शोध हब के रूप में काम करेगा, जो अकादमिक विशेषज्ञता को पारंपरिक शिल्प कौशल के साथ जोड़ेगा। हथकरघा प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक सटीकता को एकीकृत करके, यह सुविधा उत्पादन को मानकीकृत करने, बुनकर उत्पादकता बढ़ाने और पारंपरिक बुनाई से जुड़े शारीरिक श्रम को कम करने का लक्ष्य रखेगी।
सेक्टर के आधुनिकीकरण की रणनीति
भारतीय कपड़ा क्षेत्र, जो अक्सर मैन्युअल उत्पादन की बाधाओं और सीमित बाजार पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करता है, के लिए यह पहल विरासत शिल्प और आधुनिक विनिर्माण के बीच की खाई को पाटने का एक लक्षित प्रयास है। विकास आयुक्त (हथकरघा) ने कहा कि सरकार IITs और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी पर तेजी से भरोसा कर रही है ताकि इस परिवर्तन को गति दी जा सके। तकनीकी उन्नयन के अलावा, सरकार 'इंडियन हैंडमेड पोर्टल' (Indian Handmade Portal) को भी बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। यह एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जिसे बुनकरों को सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करने और पारंपरिक बिचौलियों को हटाकर उनके मुनाफे को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रभाव और निगरानी योग्य पहलू
हालांकि भारत में हथकरघा अभी भी एक विकेन्द्रीकृत और खंडित क्षेत्र बना हुआ है, तकनीकी एकीकरण पर ध्यान औद्योगिक नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। इन पहलों की सफलता ग्रामीण बुनकर सहकारी समितियों के बीच नई तकनीकों को अपनाने की वास्तविक दर और राजस्व बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों की प्रभावी स्केलिंग पर बहुत अधिक निर्भर करेगी। निवेशक और उद्योग पर्यवेक्षक संभवतः इस बात पर नज़र रखेंगे कि नया उत्कृष्टता केंद्र इन प्रोटोटाइप समाधानों को स्केलेबल, किफायती उपकरणों में कितनी प्रभावी ढंग से बदल सकता है जिन्हें बुनकर जमीन पर लागू कर सकें। भविष्य के अपडेट में केंद्र के विशिष्ट शोध फोकस क्षेत्रों, उत्पादन समय-सीमा पर इन तकनीकों के मूर्त प्रभाव और कच्चे माल की बढ़ती लागत की पृष्ठभूमि में बुनकरों की आय के स्तर को सार्थक रूप से बढ़ाने में डिजिटल पोर्टलों की क्षमता को ट्रैक किया जाएगा।
