IIT Delhi में छात्र खुदकुशी का मामला: सुधारे की मांग के बीच बढ़ता जा रहा दबाव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
IIT Delhi में छात्र खुदकुशी का मामला: सुधारे की मांग के बीच बढ़ता जा रहा दबाव

IIT Delhi में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है, जो संस्था के भीतर की गहरी खामियों को उजागर कर रहा है। पिछले **30** महीनों में यहां **8** छात्र खुदकुशी कर चुके हैं। दो दशकों में सभी IIT परिसरों में **160** मौतें होने के बाद, अब सुप्रीम कोर्ट ने एक नेशनल टास्क फोर्स गठित की है ताकि प्रशासनिक जवाबदेही तय की जा सके।

कैंपस का माहौल और छात्रों का विरोध

अगस्त 2026 में IIT Delhi के छात्रों ने 5 दिनों तक जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध उस वक्त भड़का जब कैंपस में पिछले 30 महीनों में आठवीं बार एक छात्र ने खुदकुशी जैसा कदम उठाया। आम तौर पर छात्र प्लेसमेंट और एकेडमिक करियर पर असर पड़ने के डर से चुप रहते थे, लेकिन इस बार उनका यह विरोध एक बड़े बदलाव की आहट माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए संस्थान को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने साफ किया कि 'एलिट' यानी प्रतिष्ठित संस्थान होने का मतलब यह नहीं कि आप कानूनी प्रक्रियाओं से ऊपर हैं। जातिगत भेदभाव के आरोपों को केवल 'एकेडमिक प्रेशर' बताकर खारिज नहीं किया जा सकता।

नेशनल टास्क फोर्स का गठन

देश भर के 17 IIT परिसरों में पिछले 20 वर्षों में 160 छात्रों की जान जाने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 10 सदस्यीय 'नेशनल टास्क फोर्स फॉर स्टूडेंट मेंटल हेल्थ एंड सुसाइड प्रिवेंशन' का गठन किया है। इस टास्क फोर्स का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासन हर घटना में पूरी पारदर्शिता बरते।

पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौती

आलोचकों का मानना है कि IIT के मौजूदा मॉडल में 'प्रतिष्ठा' को छात्रों की भलाई से ऊपर रखा जाता है। जनवरी 2026 में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब हर सुसाइड केस को स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि पहले जैसी 'अस्पष्टता' (opacity) खत्म हो सके। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रशासन रक्षात्मक रवैया छोड़कर छात्रों की मानसिक सेहत के लिए वाकई संवेदनशील कदम उठाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.