IIT Bombay में एक छात्र की दुखद मौत के बाद संस्थान पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले की जांच के बीच डीन को सस्पेंड कर दिया गया है और FIR दर्ज की गई है, जिससे कैंपस में जातिगत भेदभाव और जवाबदेही पर देशभर में बहस छिड़ गई है।
कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई
18 सितंबर, 2026 को IIT Bombay के दूसरे वर्ष के बी.टेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के प्रशासनिक मामलों के डीन, प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को सस्पेंड कर दिया गया है।
सिस्टम पर उठे सवाल
यह मामला कैंपस की शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal Mechanisms) की कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा कर रहा है। हालांकि, हाशिए पर रहने वाले छात्रों के लिए SC/ST सेल बनाने के निर्देश पहले से मौजूद हैं, लेकिन छात्र समूहों का आरोप है कि ये सेल केवल कागजों तक सीमित हैं। फंड की कमी और इन कमेटियों में उन फैकल्टी सदस्यों की मौजूदगी, जिनके अधीन छात्र अपनी पढ़ाई करते हैं, हितों के टकराव (Conflict of Interest) को जन्म देती है, जिससे छात्र अपनी शिकायत रखने से डरते हैं।
आंकड़े और बड़ा जोखिम
आधिकारिक डेटा के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में विभिन्न IIT परिसरों में कम से कम 53 छात्रों ने आत्महत्या की है। यह बढ़ती संख्या नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (NCSC) और छात्र संगठनों के लिए चिंता का विषय है। आलोचकों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक अलगाव के बीच व्यवस्था छात्रों को जरूरी भावनात्मक सहारा देने में विफल रही है।
भविष्य की चुनौतियां
अब सबकी नजरें जांच के नतीजों और शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) द्वारा जारी किए जाने वाले दिशानिर्देशों पर टिकी हैं। क्या IIT ब्रांड अपनी प्रतिष्ठा बचा पाएगा और क्या संस्थान केवल कमेटियां बनाने से आगे बढ़कर वास्तव में समावेशी संस्कृति को अपना पाएंगे? यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार अब फैकल्टी ट्रेनिंग और स्टूडेंट सपोर्ट सिस्टम में कोई अनिवार्य बदलाव लाती है।
