आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस गोल्ड मेडलिस्ट विवेक शर्मा ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अमेरिका की एक टेक कंपनी से मिले करीब **₹2.9 करोड़** सालाना के पैकेज वाली नौकरी को ठुकरा दिया है। अब वे कानपुर में अपने माता-पिता की देखभाल के लिए रुके हैं और एक किराना दुकान चला रहे हैं।
करियर का अहम मोड़
आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में गोल्ड मेडल जीतने वाले विवेक शर्मा ने सबको चौंका दिया है। अमेरिका की एक बड़ी टेक कंपनी ने उन्हें $240,000 (करीब ₹2.9 करोड़) सालाना की नौकरी का ऑफर दिया था, जिसमें कंपनी ने अमेरिका शिफ्ट होने और वीजा की मदद का भी वादा किया था। यह आमतौर पर टॉप इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए एक बेहतरीन करियर का रास्ता माना जाता है।
परिवार की सेहत को दी प्राथमिकता
यह बड़ा फैसला तब आया जब विवेक के परिवार में अचानक मुश्किलें आ गईं। अमेरिका जाने से ठीक पहले उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा और उसी दौरान उनकी माँ को कैंसर होने का पता चला। एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले विवेक ने अपने माता-पिता की देखभाल के लिए विदेश की नौकरी छोड़ने का फैसला किया और अपने गृहनगर कानपुर में रहने का निर्णय लिया।
कानपुर में नई शुरुआत
फिलहाल विवेक कानपुर में ही हैं और स्थानीय व्यवसाय व समाज सेवा से जुड़ गए हैं। वे अपने घर के नीचे एक किराना की दुकान संभाल रहे हैं। इसके साथ ही, अपनी तकनीकी कुशलता का इस्तेमाल करते हुए वे इलाके के जरूरतमंद बच्चों को कोडिंग और कंप्यूटर सिखा रहे हैं। हाई-टेक करियर छोड़कर छोटे स्तर का बिजनेस और समाज सेवा में आना, यह सब उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण प्राथमिकताएं बदलने का नतीजा है।
###The Big Picture
यह कहानी उन कई भारतीय मेधावी छात्रों की एक बानगी है जो बड़ी अंतरराष्ट्रीय नौकरियों की बजाय अपने देश में रहकर कुछ अलग करना चाहते हैं। यह मामला वैश्विक करियर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन को दर्शाता है। साथ ही, यह इस बढ़ते चलन पर भी प्रकाश डालता है कि कैसे इंजीनियरिंग के हुनरमंद युवा, मुख्यधारा की कॉर्पोरेट दुनिया से दूर रहते हुए भी जमीनी स्तर पर शिक्षा और समुदाय के विकास में योगदान दे रहे हैं।
