भारत अपने समुद्री बीमा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस-टेक सिटी (GIFT IFSC) में प्रोटेक्शन एंड इंडेमनिटी (P&I) क्लब स्थापित करने के लिए इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने कंसल्टेशन पेपर को अंतिम रूप दे दिया है।
Detailed Coverage
समुद्री बीमा में आत्मनिर्भरता की ओर भारत का कदम
IFSCA द्वारा इस कंसल्टेशन पेपर के अंतिम रूप दिए जाने का मतलब है कि अब भारत समुद्री देनदारियों (marine liabilities) को कवर करने के लिए एक मजबूत घरेलू क्षमता विकसित करने की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल, भारतीय जहाज मालिक थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस के लिए मुख्य रूप से विदेशी P&I क्लबों पर निर्भर हैं, जो 'इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ P&I क्लब्स' का हिस्सा हैं। इस निर्भरता के कारण प्रीमियम के रूप में बड़ा पैसा देश से बाहर जाता है।
P&I इंश्योरेंस क्या है?
यह समझना जरूरी है कि P&I इंश्योरेंस, सामान्य हल इंश्योरेंस से अलग है। हल इंश्योरेंस जहां जहाज को हुए भौतिक नुकसान की भरपाई करता है, वहीं P&I इंश्योरेंस तीसरी पार्टी की देनदारियों जैसे तेल रिसाव (oil pollution) की सफाई, कार्गो को हुए नुकसान, चालक दल की चोट या मृत्यु पर मुआवजा, और जहाज के मलबे को हटाने (wreck removal) जैसे महंगे खर्चों को कवर करता है। चूंकि ऐसे दावे बहुत बड़े और अप्रत्याशित हो सकते हैं, P&I क्लब आपसी संघ (mutual associations) के रूप में काम करते हैं, जहां जहाज मालिक एक साझा फंड में योगदान देकर जोखिम साझा करते हैं। GIFT City में बनने वाला नया ढांचा इसी मॉडल को भारतीय नियामक माहौल में लागू करेगा।
प्रस्तावित स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) की भूमिका
इस पूरी परियोजना के प्रबंधन के लिए, IFSCA ने एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का प्रस्ताव रखा है। यह SPV क्लब की संस्थागत रीढ़ के रूप में काम करेगा। SPV का काम शिपिंग, वित्तीय और बीमा क्षेत्रों के हितधारकों को एक साथ लाना होगा। इसकी मुख्य जिम्मेदारियों में शुरुआती पूंजी जुटाना, शासन मानकों (governance standards) को स्थापित करना और आपसी फंड (mutual fund) के प्रबंधन के लिए आवश्यक परिचालन विशेषज्ञता प्रदान करना शामिल होगा। इस अलग संरचना के निर्माण से यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य है कि P&I क्लब वित्तीय रूप से सुरक्षित रहे और स्पष्ट नियामक निगरानी में काम करे।
आगे के कदम और निगरानी
IFSCA के चेयरमैन के. राजारमन ने संकेत दिया है कि इस पहल का अगला चरण अगले तीन महीनों के भीतर आगे बढ़ना चाहिए। निवेशक और उद्योग जगत के पर्यवेक्षक वर्तमान में SPV के प्रस्ताव पर सरकारी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। चूंकि अथॉरिटी ने पहले ही केंद्रीय सरकार को प्रस्ताव भेजने की समय-सीमा का संकेत दिया था, इसलिए आने वाले महीने यह देखने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि यह परियोजना परिचालन स्थिति की ओर कैसे बढ़ती है। उद्योग के लिए मुख्य निगरानी योग्य कारक SPV संरचना का अंतिम रूप देना होगा, जो यह तय करेगा कि क्लब कितनी जल्दी सदस्यों को शामिल करना और भारतीय शिपिंग उद्योग के लिए कवरेज प्रदान करना शुरू कर सकता है।
