ICE का बड़ा फैसला: हिरासत में बंद हजारों लोगों की ट्रैकिंग हुई बंद, वकीलों की बढ़ी मुश्किल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ICE का बड़ा फैसला: हिरासत में बंद हजारों लोगों की ट्रैकिंग हुई बंद, वकीलों की बढ़ी मुश्किल

U.S. Immigration and Customs Enforcement (ICE) ने अपने ऑनलाइन ट्रैकिंग डेटाबेस से उन हजारों लोगों का डेटा हटा दिया है जिनके खिलाफ अंतिम निर्वासन (final deportation) आदेश जारी हो चुके हैं। 15 सितंबर से लागू इस बदलाव के कारण अब परिवारों और वकीलों के लिए हिरासत में रखे गए व्यक्तियों को ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया है।

अमेरिकी एजेंसी U.S. Immigration and Customs Enforcement (ICE) ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए अपने ऑनलाइन लोकेटर सिस्टम से उन बंदियों का नाम हटा दिया है, जिनके निर्वासन के आदेश पक्के हो चुके हैं। बिना किसी आधिकारिक घोषणा के लागू किए गए इस बदलाव ने कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। 2010 में शुरू की गई यह सुविधा पारदर्शिता के लिए थी, जिससे हिरासत में लिए गए लोगों का स्थान पता करना आसान था।

कानूनी दांव-पेच पर असर

वकीलों का कहना है कि डेटा न मिलने से वे बंदियों के लिए जरूरी कानूनी कदम, जैसे 'हेबियस याचिका' (habeas petitions) दाखिल करने में असमर्थ हैं। American Immigration Lawyers Association ने इस कदम को अटॉर्नी-क्लाइंट संबंधों में एक बड़ी बाधा बताया है। निर्वासन की कगार पर खड़े लोगों के लिए यह स्थिति उनके बुनियादी कानूनी अधिकारों और सुरक्षा तक पहुंच को सीमित कर रही है।

दायरे में आए 16,000 लोग

जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 16,000 लोग अंतिम निष्कासन आदेशों के तहत हिरासत में थे। हालांकि, यह नियम हर जगह समान नहीं है। एडेलैंटो (कैलिफोर्निया), मिनियापोलिस, न्यूयॉर्क और शिकागो की कुछ साइट्स पर बंदियों की जानकारी अब भी सिस्टम में दिख रही है, क्योंकि वहां सक्रिय मुकदमेबाजी (litigation mandates) के कारण एजेंसी कानूनी रूप से उनकी जानकारी साझा करने के लिए बाध्य है। शेष बंदियों की जानकारी गायब होने से उनकी कानूनी सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.