ICAI Reforms: अब ग्लोबल फर्मों को टक्कर देंगी भारतीय अकाउंटिंग कंपनियां, बदलेगा पूरा इकोसिस्टम

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AuthorNeha Patil|Published at:
ICAI Reforms: अब ग्लोबल फर्मों को टक्कर देंगी भारतीय अकाउंटिंग कंपनियां, बदलेगा पूरा इकोसिस्टम

ICAI घरेलू अकाउंटिंग फर्मों को बड़ा बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई योजना पर काम कर रहा है। इसमें मल्टी-डिसिप्लिनरी पार्टनरशिप, पूंजी जुटाने की आजादी और 'CA Setu' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की तैयारी है, जिसका प्रस्ताव अगले **2 महीनों** में आ सकता है।

बड़े बदलाव की तैयारी

Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) एक ऐसा व्यापक रिफॉर्म पैकेज तैयार कर रहा है, जो भारतीय अकाउंटिंग फर्मों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू फर्मों को इतना सक्षम बनाना है कि वे ऑडिट, कंसल्टेंसी और ट्रांजैक्शन एडवाइजरी जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल नेटवर्क्स के साथ बराबरी पर मुकाबला कर सकें।

क्या है मास्टर प्लान?

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में सबसे बड़ा बदलाव 'मल्टी-डिसिप्लिनरी पार्टनरशिप' को अनुमति देना है। इसके तहत अब अकाउंटिंग फर्में अपने साथ कंपनी सेक्रेटरी, कॉस्ट अकाउंटेंट, वकील, इंजीनियर, एक्चुअरी और आर्किटेक्ट्स जैसे पेशेवरों को जोड़ सकेंगी। इससे ये फर्में एक ही छत के नीचे ग्राहकों को वाइड-रेंजिंग समाधान दे पाएंगी।

पूंजी की बाधा होगी दूर

अब तक भारतीय फर्मों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कैपिटल (Capital) की रही है। ग्लोबल फर्मों के पास भारी बैलेंस शीट और टेक्नोलॉजी में निवेश करने की ताकत होती है, जबकि घरेलू फर्में संसाधनों की कमी से जूझती हैं। ICAI अब कैपिटल इन्फ्यूजन (Capital Infusion) और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट के लिए औपचारिक मैकेनिज्म तैयार कर रहा है।

'CA Setu' बनेगा गेम चेंजर

ICAI एक डिजिटल प्लेटफॉर्म 'CA Setu' लॉन्च करेगा, जिसका काम चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को एक-दूसरे से जोड़ना है। इसके जरिए मर्जर, नेटवर्किंग, रेफरल और स्पेशलाइजेशन के मौके मिलेंगे, जिससे छोटी फर्में आपस में मिलकर बड़े स्तर पर काम कर सकेंगी।

रेगुलेटरी बदलाव और असर

ICAI अपनी 2006 की गाइडलाइन्स की समीक्षा कर रहा है और Chartered Accountants Act में संशोधन के लिए Ministry of Corporate Affairs और संसद के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है। आने वाले समय में सरकारी कंसल्टिंग असाइनमेंट्स में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भागीदारी आसान हो सकती है, जिससे भारत की सूचीबद्ध कंपनियों को ऑडिट और एडवाइजरी सेवाओं के लिए बेहतर और विकल्प मिलेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.