इंडियाज साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने देश भर के निवेशकों को ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कैम (Investment Scam) को लेकर आगाह किया है। स्कैमर्स अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और बड़े उद्योगपतियों की डीपफेक (Deepfake) तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं, ताकि झूठी विश्वसनीयता दिखाकर लोगों से ठगी की जा सके।
स्कैम का नया तरीका
ये धोखाधड़ी वाले विज्ञापन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर खूब चल रहे हैं। इनमें बड़े नेताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल कर निवेशकों को ऊंचे और गारंटीड रिटर्न (Guaranteed Return) या जल्दी अमीर बनने का लालच दिया जाता है।
कैसे काम करता है स्कैम?
शुरुआत में, स्कैमर्स एक प्रायोजित विज्ञापन (Sponsored Advertisement) दिखाते हैं, जिसमें किसी बड़े नेता की तस्वीर या वीडियो होती है। यह विज्ञापन आपको किसी अनौपचारिक वेबसाइट या व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे प्राइवेट मैसेजिंग ग्रुप्स पर ले जाता है।
पीड़ितों को पहले ₹500 से ₹5,000 जैसी छोटी रकम जमा करने के लिए कहा जाता है। भरोसा बनाने के लिए, स्कैमर्स नकली डैशबोर्ड (Fake Dashboard) दिखाते हैं, जिसमें बनावटी मुनाफा (Artificial Profit) दिखाया जाता है। जब पीड़ित को लगता है कि पैसा बढ़ रहा है, तो स्कैमर्स उसे और बड़ी रकम निवेश करने के लिए दबाव डालते हैं।
लेकिन जैसे ही कोई बड़ी रकम निवेश करता है और उसे निकालने की कोशिश करता है, तो स्कैमर्स नकली टैक्स (Fake Taxes) या प्रोसेसिंग फीस (Processing Fees) की मांग करते हैं। आखिर में, वे पीड़ित से संपर्क तोड़ देते हैं और वेबसाइट बंद कर देते हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी वेरिफिकेशन
इस तरह के स्कैम से बचने के लिए, किसी भी इन्वेस्टमेंट स्कीम (Investment Scheme) की सच्चाई जानना बहुत ज़रूरी है। निवेशकों को हमेशा सेबी (SEBI) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर यह चेक करना चाहिए कि कंपनी रजिस्टर्ड है या नहीं। सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों पर कभी भरोसा न करें, चाहे उसमें कोई भी बड़ा चेहरा क्यों न हो।
हमेशा कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट, कॉन्टैक्ट डिटेल्स और फिजिकल एड्रेस को वेरिफाई करें। अगर कोई इन्वेस्टमेंट का मौका आपको सच से परे लगता है, तो वह अक्सर एक बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) होता है।
अगर आप टारगेट हुए तो क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आप किसी धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं या पैसे भेज चुके हैं, तो तुरंत एक्शन लें। अपने बैंक से तुरंत संपर्क करें और आगे के ट्रांजैक्शन (Transaction) रोकने की कोशिश करें। इस घटना की रिपोर्ट नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करके करें। लेन-देन की रसीदें, बातचीत के स्क्रीनशॉट और वेबसाइट लिंक जैसे सबूत संभाल कर रखें, ताकि अथॉरिटीज अपराधियों को ट्रैक कर सकें।
