फिटनेस रेस इवेंट 'Hyrox India' को भारतीय प्रतिभागियों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। खराब जजिंग, पेनल्टी में पारदर्शिता की कमी और इक्विपमेंट की क्वालिटी को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। ₹8,000 से ज़्यादा की रजिस्ट्रेशन फीस को देखते हुए, इन ऑपरेशनल दिक्कतों पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह रेस भारतीय एथलीट्स के लिए कंसिस्टेंट अनुभव दे पाएगी।
Detailed Coverage
जजिंग में पारदर्शिता और पेनल्टी का सवाल?
प्रतिभागियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी रेफरी के फैसलों में स्पष्टता की कमी है। लोगों का कहना है कि पेनल्टी (जो फाइनल टाइम में जोड़ी जाती हैं) कैसे कैलकुलेट की जा रही हैं, इसका कोई साफ तरीका नहीं है। कुछ एथलीट्स ने तो यह भी बताया है कि उन्हें बिना किसी डिटेल के ही भारी-भरकम टाइम पेनल्टी दे दी गई। नियमों को लेकर इस तरह की कम्युनिकेशन की कमी से लोगों में कन्फ्यूजन बढ़ रहा है।
इक्विपमेंट की क्वालिटी और स्टैंडर्ड का मुद्दा
जजिंग के अलावा, इवेंट्स में इस्तेमाल होने वाले फिजिकल इक्विपमेंट को लेकर भी चिंता जताई गई है। खिलाड़ियों ने टूटी हुई रोइंग मशीनों और खराब मेंटेनेंस वाले उपकरणों के बारे में शिकायत की है, जिससे परफॉर्मेंस और सेफ्टी दोनों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, भारत में होने वाले इवेंट्स और इंटरनेशनल वेन्यूज़ के बीच इक्विपमेंट की यूनिफॉर्मिटी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बढ़ती फीस और वैल्यू फॉर मनी का सवाल
इन समस्याओं के साथ-साथ, इवेंट में हिस्सा लेने की फीस भी काफी बढ़ गई है। दिल्ली में हाल के इवेंट्स के लिए रजिस्ट्रेशन फीस ₹8,000 के पार चली गई है, जो कि मुंबई में हुए पहले इवेंट की ₹6,000 की फीस से काफी ज़्यादा है। ऐसे में, जब इक्विपमेंट खराब मिलते हैं या जजिंग समझ नहीं आती, तो यह फीस और मिलने वाले अनुभव के बीच एक बड़ा गैप पैदा करता है।
अब देखना यह होगा कि Hyrox India अपने इन ऑपरेशन्स को कैसे सुधारता है। निवेशकों और स्पोर्ट्स-इवेंट सेक्टर के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वे पेनल्टी डिस्क्लोजर, इक्विपमेंट मेंटेनेंस और ब्रांड की रेपुटेशन जैसी दिक्कतों को दूर कर पाते हैं।
