हैदराबाद स्टार्टअप इंडेक्स 2026: फंड की कमी है बड़ी चुनौती

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
हैदराबाद स्टार्टअप इंडेक्स 2026: फंड की कमी है बड़ी चुनौती

हैदराबाद स्टार्टअप रेडीनेस इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आगे बढ़ने के लिए बेहतर ग्रोथ कैपिटल और मार्केट एक्सेस की जरूरत है। भले ही हैदराबाद इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट में आगे है, लेकिन निवेशकों का मानना है कि फंडिंग की ये दिक्कतें आगे की ग्रोथ के लिए बड़ी बाधाएं हैं। इस रीजन में फिलहाल 10,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं।

Detailed Coverage

हैदराबाद का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब शुरुआती दौर से निकलकर बड़े पैमाने पर विस्तार (scaling) की ओर बढ़ रहा है। वेंचर कैपिटल फर्म एंडिया पार्टनर्स द्वारा जारी की गई नई 'हैदराबाद स्टार्टअप रेडीनेस इंडेक्स 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, शहर की ऑपरेशनल मजबूती और फाइनेंसियल सपोर्ट स्ट्रक्चर के बीच एक बड़ा गैप दिख रहा है। हैदराबाद अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और लागत-दक्षता (cost efficiency) के लिए जाना जाता है, लेकिन फाउंडर्स और इन्वेस्टर्स का कहना है कि लंबी अवधि की कैपिटल जुटाना अब ग्रोथ के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट अभी भी मुख्य ताकत

इस इंडेक्स में इकोसिस्टम कॉन्फिडेंस स्कोर 6.5/10 है, जो 216 इंडस्ट्री पार्टिसिपेंट्स की राय पर आधारित है। ज्यादातर लोगों ने हैदराबाद के फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को सबसे बड़ी ताकत बताया है। इसके बाद स्किल्ड टैलेंट की उपलब्धता और कम लागत वाले ऑपरेशन का नंबर आता है। इन फैक्टर्स की वजह से ही यह शहर 10,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स और 355 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का हब बन गया है। GCCs की संख्या, जो देश के कुल का लगभग 20% है, एक मजबूत कॉर्पोरेट माहौल देती है जो लोकल इनोवेशन को बढ़ावा देता है।

ग्रोथ कैपिटल की ओर बढ़ता फोकस

इन मजबूतियों के बावजूद, रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा फंडिंग माहौल तेजी से बढ़ रहे वेंचर्स की जरूरतों को पूरा करने में पीछे छूट रहा है। 33% और 29% पार्टिसिपेंट्स ने ग्रोथ कैपिटल और बड़े मार्केट एक्सेस को सुधार के लिए सबसे जरूरी क्षेत्र बताया है। इन्वेस्टर्स के लिए, यह एक संकेत है कि अब सिर्फ सीड-लेवल सपोर्ट से आगे बढ़कर ऐसे गहरे कैपिटल पूल की जरूरत है जो कंपनियों को डोमेस्टिक और इंटरनेशनल लेवल पर स्केल करने में मदद कर सकें।

साल 2014 से अब तक, हैदराबाद इकोसिस्टम ने 380 से ज्यादा डील्स में $3 बिलियन से ज्यादा का वेंचर फंडिंग आकर्षित किया है। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए फोकस में बदलाव की जरूरत है। भविष्य का विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि पॉलिसीमेकर्स, इन्वेस्टर्स और स्टार्टअप फाउंडर्स मिलकर लेट-स्टेज फंडिंग के इस गैप को कैसे भरते हैं। मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए, यह देखना अहम होगा कि क्या नए वेंचर फंड्स या बढ़ी हुई इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन आने वाले सालों में इन कैपिटल की कमी को दूर कर पाते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.