हैदराबाद पुलिस ने WhatsApp पर चल रहे एक नए और खतरनाक बैंकिंग फ्रॉड को लेकर अलर्ट जारी किया है। इसमें स्कैमर्स फर्जी डेबिट अलर्ट भेजकर यूजर से 'NO' रिप्लाई मांगते हैं, जिसके बाद एक मालवेयर स्क्रिप्ट आपके फोन का एक्सेस हैकर्स को दे देती है।
जालसाज कैसे बिछाते हैं जाल?
यह फ्रॉड पूरी तरह से डर और टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल पर आधारित है। स्कैमर्स अनजान नंबरों से मैसेज भेजते हैं, जिसमें दावा किया जाता है कि आपके बैंक खाते से एक बड़ी रकम काट ली गई है। मैसेज में लिखा होता है कि अगर यह ट्रांजेक्शन आपने नहीं किया है, तो 'NO' लिखकर रिप्लाई करें। पुराने फिशिंग स्कैम में लिंक पर क्लिक करना पड़ता था, लेकिन यहाँ केवल 'NO' टाइप करने से मैसेज में छिपी एक ऑटोमेटेड मालवेयर स्क्रिप्ट एक्टिवेट हो जाती है। यह स्क्रिप्ट सीधे आपके डिवाइस का एक्सेस हैकर्स को दे देती है, जिससे वे आपके बैंकिंग ऐप्स तक पहुँचकर पूरा बैलेंस खाली कर सकते हैं।
डिजिटल बैंकिंग पर संकट
भारत में UPI और डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही साइबर सुरक्षा का खतरा भी बड़ा हो गया है। इस तरह के साइबर हमलों ने बैंकों की सुरक्षा प्रणालियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। फाइनेंशियल संस्थाएं अब अपनी साइबर सुरक्षा और कस्टमर अवेयरनेस प्रोग्राम्स पर ज्यादा निवेश कर रही हैं ताकि यूजर का भरोसा बना रहे।
क्या करें और क्या नहीं?
याद रखें, कोई भी असली बैंक WhatsApp के जरिए ट्रांजेक्शन विवादों को सुलझाने या ऑथेंटिकेशन के लिए संपर्क नहीं करता है। अगर आपको ऐसा कोई संदिग्ध मैसेज मिले, तो तुरंत उस नंबर को ब्लॉक करें और मैसेज डिलीट कर दें। अगर आपको किसी भी तरह का शक हो, तो अपने बैंक के आधिकारिक ऐप या हेल्पलाइन का ही इस्तेमाल करें।
फ्रॉड होने पर कहां करें रिपोर्ट?
अगर आपको लगता है कि आपका फोन या बैंकिंग ऐप किसी ने हैक कर लिया है, तो घबराएं नहीं। तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी आप रिपोर्ट करेंगे, अधिकारियों के लिए उतनी ही आसानी से फंड्स को फ्रीज करना और जालसाजों को ट्रैक करना संभव होगा।
