हंगरी ने ₹7,800 करोड़ के वेंटिलेटर डील पर दर्ज कराई शिकायत, फ्रॉड का शक

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AuthorNeha Patil|Published at:
हंगरी ने ₹7,800 करोड़ के वेंटिलेटर डील पर दर्ज कराई शिकायत, फ्रॉड का शक

हंगरी के अधिकारियों ने **2020** में **$96.5 करोड़** (लगभग **₹7,800 करोड़**) के **17,000 वेंटिलेटर** की सरकारी खरीद के मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज की है। इस डील में धोखाधड़ी और कुप्रबंधन के आरोप लगाए गए हैं।

कोरोना काल की डील पर जांच का शिकंजा

हंगरी की सरकार ने 2020 में चीन से खरीदे गए 17,000 वेंटिलेटरों की डील में गड़बड़ी का शक जताते हुए एक आपराधिक जांच शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें वित्तीय जिम्मेदारी के उल्लंघन और खरीद प्रक्रिया से जुड़े संभावित आपराधिक अपराधों का जिक्र है। इस सौदे का कुल मूल्य लगभग $96.5 करोड़ यानी करीब ₹7,800 करोड़ था।

डील में क्या हुई गड़बड़ियां?

जांच के मुताबिक, कोरोना महामारी की शुरुआत में हुए इस सौदे में कई खामियां पाई गईं। आरोप है कि इसमें बिचौलिए के तौर पर काम करने वाली कंपनियों ने इस सौदे से खूब मुनाफा कमाया। सरकारी बयान में यह भी कहा गया कि खरीदी गई वेंटिलेटरों का एक बड़ा हिस्सा खराब निकला, जबकि कई यूनिट्स तो इस्तेमाल ही नहीं की गईं, जिस पर सरकार को लगातार स्टोरेज का खर्च उठाना पड़ रहा है।

गवर्नेंस और हितों के टकराव का मुद्दा

यह मामला निवेशकों के लिए बड़ी चेतावनी है, खासकर तब जब किसी संकट के समय बड़े सरकारी सौदे किए जाते हैं। इस जांच से पूर्व विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्तो (Péter Szijjártó) के कामों पर भी फिर से ध्यान गया है। सिज्जार्तो, जिन्होंने इस वेंटिलेटर खरीद के साथ-साथ कई बड़े विदेशी सौदों की निगरानी की थी, हाल ही में चीनी कार निर्माता BYD में शामिल होने के लिए संसद से इस्तीफा दे चुके हैं।

वर्तमान सरकार सिज्जार्तो के कार्यकाल के दौरान हुए सरकारी सब्सिडी और निवेश सौदों की समीक्षा कर रही है, जिसमें BYD से जुड़े सौदे भी शामिल हैं। यह स्थिति गवर्नेंस जोखिम का एक उदाहरण है, जहां सत्ता बदलने पर पिछली सरकारों के सौदों की ऑडिटिंग की जाती है। ऐसे ऑडिट से उन कंपनियों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है जो पहले सरकारी समझौतों में शामिल थीं, क्योंकि शर्तों और सब्सिडी की जांच की जा सकती है।

निवेशकों के लिए तत्काल निगरानी का विषय यह है कि यह कानूनी जांच कितनी आगे बढ़ती है और क्या इससे अन्य सरकारी अनुबंधों की भी विस्तृत जांच होती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ पिछले सब्सिडी सौदों की समीक्षा करने की सरकार की मंशा हंगरी में विदेशी निवेश की निगरानी के तरीके में बदलाव का संकेत दे सकती है, जो इस क्षेत्र में सरकारी परियोजनाओं से जुड़े कंपनियों के लिए जोखिम को प्रभावित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.