अगर आपके पास किसी भी फाइनेंसियल ईयर में अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में इसकी जानकारी देनी होगी, भले ही आपने शेयर बेचे न हों। सही जानकारी न देने पर टैक्स डिपार्टमेंट की नज़र में आ सकते हैं।
Detailed Coverage
ITR में क्यों ज़रूरी है अनलिस्टेड शेयर्स का खुलासा?
केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों को सख्त कर दिया है। अब व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स और हिंदू अविभाजित परिवार (HUFs) के लिए यह अनिवार्य है कि अगर उनके पास किसी भी फाइनेंसियल ईयर में किसी ऐसी कंपनी के इक्विटी शेयर हैं जो NSE या BSE जैसे मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं हैं, तो उन्हें ITR में इसकी जानकारी देनी ही होगी। यह नियम तब भी लागू होगा, जब आपने साल के दौरान कोई शेयर बेचा न हो या उनसे कोई इनकम न हुई हो।
कौन सा ITR फॉर्म चुनें?
अनलिस्टेड शेयर्स की जानकारी देने के लिए कोई एक खास ITR फॉर्म नहीं है। आपके ITR फॉर्म का चुनाव आपकी कुल आय पर निर्भर करेगा।
- ITR-2: अगर आपकी बिज़नेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है, तो आप ITR-2 फाइल कर सकते हैं।
- ITR-3: अगर आपको प्रोफेशन या बिज़नेस से आय होती है, तो आपको ITR-3 चुनना होगा।
- ITR-5, ITR-6, ITR-7: कंपनियां, ट्रस्ट या फर्म्स को अपने संबंधित ITR फॉर्म (ITR-5, ITR-6, या ITR-7) में ही इसकी रिपोर्टिंग करनी होगी।
गलत ITR फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव या अमान्य भी माना जा सकता है।
क्या-क्या जानकारी देनी होगी?
ITR फाइल करते समय, आपको हर उस अनलिस्टेड कंपनी की पूरी जानकारी देनी होगी जिसमें आपकी हिस्सेदारी है। इसमें शामिल हैं:
- कंपनी का पूरा लीगल नाम
- कंपनी का पैन (PAN)
- शेयरहोल्डिंग की पूरी जानकारी
आपको यह भी बताना होगा कि आपने साल की शुरुआत और अंत में कितने शेयर रखे, साथ ही साल के दौरान कितने शेयर खरीदे, बेचे या ट्रांसफर किए। इन शेयर्स की खरीद लागत (Cost of Acquisition) बताना भी ज़रूरी है।
अनलिस्टेड इक्विटी पर टैक्स का नियम
अनलिस्टेड शेयर्स के टैक्स नियमों को समझना बहुत ज़रूरी है। चूंकि ये शेयर पब्लिक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते, इसलिए इन पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) नहीं लगता। इन पर होने वाला मुनाफा कैपिटल गेन माना जाता है। फाइनेंस एक्ट, 2024 के बाद, अगर शेयर 24 महीने से ज़्यादा समय तक रखे जाते हैं, तो इन्हें लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा और 12.5% की दर से टैक्स लगेगा, बिना इंडेक्सेशन के फायदे के। वहीं, 24 महीने या उससे कम समय तक रखे गए शेयर्स पर होने वाले शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
नियमों का पालन न करने का जोखिम
टैक्स अथॉरिटी प्राइवेट होल्डिंग्स के ज़रिए टैक्स चोरी रोकने के लिए एसेट की रिपोर्टिंग पर ज़्यादा ध्यान दे रही है। अनलिस्टेड इक्विटी के बारे में अधूरी या गलत जानकारी देने से सिस्टम में फ्लैग आ सकता है, जिससे आपको टैक्स नोटिस मिल सकता है और आपकी पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल की जांच हो सकती है। इसलिए, फाइलिंग डेडलाइन से पहले अपने अनलिस्टेड होल्डिंग्स से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ जैसे अलॉटमेंट लेटर, शेयर सर्टिफिकेट या डीमैट स्टेटमेंट तैयार रखें ताकि कोई गड़बड़ी न हो।
