Hindustan Zinc Share: सरकारी विनिवेश की आहट से ₹577 पर आया शेयर, 4% गिरी कीमत

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Hindustan Zinc Share: सरकारी विनिवेश की आहट से ₹577 पर आया शेयर, 4% गिरी कीमत
Overview

आज यानी 5 जून 2026 को Hindustan Zinc के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सरकारी विनिवेश की खबरों के बीच शेयर **4%** से ज्यादा टूट गया। खबरें हैं कि सरकार कंपनी में **2%** हिस्सेदारी बेच सकती है, जिससे लगभग **$525 मिलियन** जुटाए जा सकते हैं।

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सरकारी हिस्सेदारी बिक्री का असर

Hindustan Zinc के शेयरों में 5 जून 2026 को भारी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का शेयर 4% से अधिक टूटकर करीब ₹577 पर आ गया। इस बिकवाली की मुख्य वजह यह खबर है कि भारतीय सरकार कंपनी में अपनी 2% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है।

बाजार की चाल के अनुसार, जब भी ऐसी किसी बड़े हिस्सेदारी बिक्री (Offer for Sale - OFS) की घोषणा होती है, तो निवेशक पहले से ही दाम में आने वाली संभावित गिरावट का अनुमान लगा लेते हैं। इसी कारण, बिक्री प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही शेयर पर दबाव आ जाता है। सरकार की कंपनी में फिलहाल करीब 29.5% हिस्सेदारी है, और ऐसे में बाजार का मानना है कि राजकोषीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सरकार समय-समय पर अपनी हिस्सेदारी बेचती रहेगी।

वैल्यूएशन और सेक्टर का विश्लेषण

लगभग 17.6x से 18.5x के ट्रेलिंग P/E रेश्यो पर कारोबार कर रहा Hindustan Zinc, एक हाई-मार्जिन और डिविडेंड देने वाली बड़ी रिसोर्स कंपनी के तौर पर अपनी वैल्यू बनाए हुए है। कंपनी का मार्केट कैप फिलहाल ₹2.44 लाख करोड़ के आसपास है, लेकिन यह अपने 52-हफ्ते के हाई ₹807.70 से काफी नीचे कारोबार कर रहा है।

हाल के दिनों में कई स्टील और मेटल कंपनियों के मार्जिन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन Hindustan Zinc को दुनिया के दूसरे सबसे बड़े इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और तीसरे सबसे बड़े सिल्वर माइनर होने का फायदा मिलता है। हालांकि, कंपनी का अपने प्रमोटर Vedanta Ltd. द्वारा अपने कर्ज को मैनेज करने के लिए लगातार बड़े डिविडेंड भुगतान पर निर्भर रहना, रिटेल निवेशकों के लिए एक दोधारी तलवार साबित हो सकता है। वे जहां लंबी अवधि में कैपिटल एप्रिसिएशन चाहते हैं, वहीं कंपनी से मिलने वाला आय (Income Yield) भी महत्वपूर्ण है।

रेगुलेटरी जोखिम और प्रशासन

शेयरों में आई हालिया गिरावट की एक वजह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती जांच भी है। ऐसी खबरें हैं कि ED ने Vedanta और उसकी सहायक कंपनी Hindustan Zinc के ऑफिसों का दौरा किया है, जो विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में था।

कंपनी ने इस बात की पुष्टि की है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और फिलहाल उनके बिजनेस ऑपरेशन्स या वित्तीय स्थिति पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ा है। लेकिन, ऐसे मामलों में ऐतिहासिक तौर पर संस्थागत निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर होता है। इसके अलावा, कंपनी को दशकों पहले हुए शुरुआती विनिवेश प्रक्रिया से जुड़े पुराने कानूनी मामलों का भी सामना करना पड़ रहा है। प्रमोटर Vedanta की जटिल स्ट्रक्चरिंग और उसके कर्ज को सपोर्ट करने के लिए कंपनी से आगे भी फंड निकाले जाने की संभावना, इसे अन्य स्वतंत्र माइनिंग कंपनियों से अलग बनाती है और यह एक प्रमुख संरचनात्मक जोखिम है।

आगे का आउटलुक

हालांकि, मौजूदा अस्थिरता के बावजूद, संस्थागत विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लगभग शून्य नेट डेट (Zero Net Debt) की स्थिति एक बचाव बफर प्रदान करती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार की आने वाली हिस्सेदारी बिक्री को लंबी अवधि के संस्थागत निवेशक कितना सोख पाते हैं, या फिर यह और अल्पकालिक मूल्य खोज (Price Discovery) को प्रेरित करेगी। वैश्विक जिंक की कीमतों में इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग के कारण मजबूती बनी हुई है। ऐसे में, मध्यम अवधि में शेयर की दिशा कमोडिटी की कीमतों पर ज्यादा निर्भर करेगी, न कि केवल सरकारी हिस्सेदारी बिक्री के घरेलू सप्लाई-डिमांड डायनामिक्स पर।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.