Hindustan Zinc Share Price: सरकारी बिकवाली की आहट से दबाव में शेयर, ₹5,000 करोड़ तक की हिस्सेदारी बेच सकती है सरकार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Hindustan Zinc Share Price: सरकारी बिकवाली की आहट से दबाव में शेयर, ₹5,000 करोड़ तक की हिस्सेदारी बेच सकती है सरकार

हिन्दुस्तान जिंक के शेयरों में आज यानी 25 अगस्त 2026 को गिरावट देखने को मिली। खबरों के मुताबिक, सरकार कंपनी में अपनी **1.5%** से **2%** हिस्सेदारी बेच सकती है। हालांकि, कंपनी ने हाल ही में अपने Q1 FY27 के शानदार नतीजे पेश किए हैं, लेकिन इस संभावित बिक्री की अटकलों से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

सरकारी बिकवाली की खबरों से शेयर पर दबाव

25 अगस्त 2026 को हिन्दुस्तान जिंक के शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। बाजार में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि सरकार कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार कंपनी के 1.5% से 2% इक्विटी को ऑफलोड करने पर विचार कर रही है। इस बिक्री से सरकार ₹4,000 करोड़ से ₹5,000 करोड़ तक जुटा सकती है।

OFS का असर और निवेशक सेंटीमेंट

शेयरों में यह गिरावट बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी बिक्री के प्रति बाजार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। ऑफर फॉर सेल (OFS) से सेकेंडरी मार्केट में शेयरों की सप्लाई बढ़ जाती है, जिससे अक्सर छोटी अवधि में कीमत में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसी तरह की सरकारी बिकवाली की घोषणा हिन्दुस्तान कॉपर में भी हुई थी, जिसने इस सेंटीमेंट को और हवा दी है।

कंपनी के नतीजे रहे दमदार

बाजार जहां संभावित बिक्री की खबर पर प्रतिक्रिया दे रहा है, वहीं कंपनी का फंडामेंटल परफॉर्मेंस काफी मजबूत बना हुआ है। हिन्दुस्तान जिंक ने हाल ही में 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के अब तक के सबसे बेहतरीन नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने ₹5,469 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 145% की बढ़ोतरी है। रेवेन्यू भी ₹13,747 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

सरकार और वेदांता की हिस्सेदारी

फिलहाल, भारत सरकार के पास हिन्दुस्तान जिंक में 27.92% हिस्सेदारी है, जबकि वेदांता लिमिटेड प्रमोटर के तौर पर 60.71% हिस्सेदारी रखती है। कंपनी के मजबूत वित्तीय नतीजों और शेयर में मौजूदा गिरावट के बीच का यह अंतर दिखाता है कि कैसे सरकारी विनिवेश जैसी मैक्रो घटनाएं, छोटी अवधि में मजबूत कमाई पर भी भारी पड़ सकती हैं।

आगे क्या?

निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या किसी आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग से इस बिक्री की टाइमिंग और प्राइसिंग की पुष्टि होगी। इन विनिवेश योजनाओं के अलावा, शेयर की चाल वैश्विक कमोडिटी ट्रेंड्स पर भी निर्भर करती है। जिंक और सिल्वर की कीमतें, साथ ही करेंसी में उतार-चढ़ाव, कंपनी के एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड रेवेन्यू में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निवेशक संभावित विनिवेश की मात्रा और समय-सीमा पर स्पष्टता के लिए आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखेंगे, जो निकट अवधि में शेयर के सप्लाई-डिमांड बैलेंस को तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.