Hindustan Zinc और Jindal Stainless: Nifty Metal में **20%** की तूफानी तेजी के बावजूद ये शेयर क्यों हैं सुस्त?

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Hindustan Zinc और Jindal Stainless: Nifty Metal में **20%** की तूफानी तेजी के बावजूद ये शेयर क्यों हैं सुस्त?

साल 2026 में Nifty Metal इंडेक्स ने **20%** का उछाल दिखाया है, लेकिन हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) और जिंदल स्टेनलेस (Jindal Stainless) के निवेशक मायूस हैं। इन शेयरों की सुस्ती के पीछे कमोडिटी के उतार-चढ़ाव और इंपोर्ट का भारी दबाव मुख्य वजह है।

साल 2026 में इंडियन शेयर मार्केट में मेटल सेक्टर सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स में से एक रहा है। Nifty Metal इंडेक्स ने साल की शुरुआत से अब तक करीब 20% की बढ़त दर्ज की है। इस रैली के पीछे स्टील और बेस मेटल्स की बढ़ती डिमांड का हाथ है। लेकिन इस सेक्टर की पूरी चमक इन दो शेयरों में नहीं दिख रही है। अगस्त 2026 के अंत तक, Hindustan Zinc और Jindal Stainless ने निगेटिव रिटर्न देकर निवेशकों को परेशान किया है।

Hindustan Zinc: चांदी और वेदांता का साया

Hindustan Zinc का शेयर इस साल करीब 3% तक गिरा है। कंपनी की कमाई मुख्य रूप से चांदी और जिंक के वैश्विक दामों पर निर्भर करती है। कमोडिटी मार्केट में उठापटक इसका बड़ा कारण रही है। हालांकि, हाल ही में Jefferies जैसी ब्रोकरेज फर्म्स की पॉजिटिव रिपोर्ट्स ने कुछ उम्मीदें जगाई हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि जिंक और चांदी की कीमतों में सुधार कंपनी के मुनाफे को बढ़ा सकता है। निवेशक अक्सर इसे वेदांता (Vedanta) ग्रुप की पैरेंट कंपनी के कर्ज और डिविडेंड पॉलिसी के नजरिए से भी देखते हैं, जो स्टॉक के सेंटीमेंट को प्रभावित करता है।

Jindal Stainless: इंपोर्ट का दबाव और मार्जिन की चुनौती

Jindal Stainless के लिए स्थिति थोड़ी कठिन रही है और शेयर इस साल 16% तक टूट चुका है। कंपनी का मार्जिन सस्ते इंपोर्टेड स्टेनलेस स्टील के कारण दबाव में है। खास तौर पर आसियान (ASEAN) देशों से आ रहे सस्ते माल ने घरेलू बाजार में कंपनी की प्राइसिंग पावर को प्रभावित किया है।

हालांकि, फाइनेंशियली कंपनी मजबूत दिख रही है। Jindal Stainless ने FY26 में अपने नेट प्रॉफिट में 27.4% की बढ़ोतरी दर्ज की है और FY27 की पहली तिमाही में 7.6% की ग्रोथ दिखाई है। कंपनी की बैलेंस शीट में डेट-टू-इक्विटी रेशियो काफी कम है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इंपोर्ट के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाती है और कंपनी निकल (Nickel) व फेरोक्रोम जैसी लागत को कैसे मैनेज करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.