Harvard University के 100 से अधिक पूर्व छात्रों और शिक्षकों ने 10 अक्टूबर को Coakroach Janta Party के प्रदर्शन के दौरान Delhi Police द्वारा की गई कार्रवाई की औपचारिक निंदा की है। इस घटना में बड़े पैमाने पर हिरासत और वकीलों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद Supreme Court को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
12 अक्टूबर, 2026 को जारी एक बयान में हार्वर्ड समुदाय के सदस्यों ने राजधानी में कानून-व्यवस्था और शासन की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व Coakroach Janta Party कर रही थी, जो मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और चुनावी रोल की प्रक्रिया को लेकर विरोध जता रहे थे।
प्रमुख विवाद और कानूनी चिंताएं
इस समूह ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने पहुंचे वकीलों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया है। बयान में हार्वर्ड लॉ स्कूल के पूर्व छात्र और सीनियर एडवोकेट शादान फरासट के साथ हुई बदसलूकी और हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की सहयोगी मेहर पसरिचा को 13 घंटे तक बिना किसी औपचारिक आरोप के हिरासत में रखे जाने का जिक्र किया गया है।
Supreme Court का हस्तक्षेप
10 अक्टूबर को हुई भारी अफरा-तफरी के कारण दिल्ली में मेट्रो सेवाएं ठप रहीं और ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। हजारों लोगों को अस्थायी हिरासत केंद्रों में रखा गया, जिसके बाद 11 अक्टूबर को Supreme Court ने एक आपातकालीन सुनवाई की। कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को बहाल करने का आदेश दिया और संवैधानिक स्वतंत्रता तथा लोक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की बात कही।
गवर्नेंस पर असर
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनावी संस्थाओं की स्थिरता और कानूनी अधिकारों का संरक्षण किसी भी स्थिर व्यावसायिक वातावरण की नींव होते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी वकीलों के साथ हुए व्यवहार पर चिंता जताई है, जो न्याय प्रशासन में बाधा का संकेत है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाती है और संस्थागत विश्वास को कैसे बहाल करती है।
