HCLTech CEO की कमाई ₹176 Cr पार; NSE और BSE ने लॉन्च किए 3-दिन के SLB कॉन्ट्रैक्ट्स

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
HCLTech CEO की कमाई ₹176 Cr पार; NSE और BSE ने लॉन्च किए 3-दिन के SLB कॉन्ट्रैक्ट्स

इस फाइनेंशियल ईयर (FY26) में भारत की टॉप कंपनियों के एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी में बड़ा उछाल आया है। HCLTech के CEO C. विजयकुमार ने करीब **₹176 करोड़** कमाए हैं। वहीं, NSE और BSE ने मार्केट लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए तीन दिन के सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) कॉन्ट्रैक्ट्स लॉन्च किए हैं। इसके अलावा, खरीफ की बुवाई **1,016.57 लाख हेक्टेयर** तक पहुंच गई है और गोल्ड ETF में लगातार विदेशी निवेश जारी है।

HCLTech CEO की कमाई में 67% का उछाल!

भारत की प्रमुख लिस्टेड कंपनियों में एग्जीक्यूटिव सैलरी पैकेज में 2026 के फाइनेंशियल ईयर में खास बढ़ोतरी देखी गई है। सबसे खास बात HCLTech के CEO C. विजयकुमार की है, जिनकी रेमुनरेशन (Remuneration) लगभग ₹176 करोड़ रही, जो पिछले साल के मुकाबले 67% ज्यादा है। इस मोटी कमाई का एक बड़ा हिस्सा लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव्स और स्टॉक यूनिट्स के इस्तेमाल से आया है। HCLTech के CEO की सैलरी कंपनी के बाकी कर्मचारियों की औसत सैलरी का लगभग 291.9 गुना है। ऐसे अनुपात पर निवेशक खास नजर रखते हैं कि मैनेजमेंट के इंसेंटिव्स और कर्मचारियों के बीच सैलरी का संतुलन कैसा है।

मार्केट के लिए बड़ी खबर: NSE और BSE ने लॉन्च किए नए SLB कॉन्ट्रैक्ट्स

बाजार के प्रतिभागियों के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने 17 अगस्त, 2026 से तीन दिन के सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) कॉन्ट्रैक्ट्स शुरू किए हैं। इस सिस्टम के जरिए ट्रेडर्स छोटे, फिक्स तीन दिनों के लिए शेयर उधार ले या दे सकते हैं, जिससे ट्रेड सेटल करने या मार्केट पोजीशन मैनेज करने में मदद मिलेगी। इस पहल का मकसद शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी बढ़ाना और एक्सचेंजों के बीच बेहतर प्राइस अलाइनमेंट सुनिश्चित करना है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन खास तीन-दिन के कॉन्ट्रैक्ट्स में फिलहाल रीपेमेंट, रिकॉल या रोलओवर का कोई ऑप्शन नहीं है। यह स्ट्रक्चर लंबे टेन्योर वाले कॉन्ट्रैक्ट्स की तुलना में थोड़ा सख्त है, जो कुछ इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स के लिए फ्लेक्सिबिलिटी कम कर सकता है।

खरीफ की बुवाई और गोल्ड ETF में निवेश

कॉर्पोरेट और मार्केट डेवलपमेंट के अलावा, एग्रीकल्चर और इन्वेस्टमेंट सेक्टर में भी हलचल है। 14 अगस्त, 2026 तक भारत में खरीफ की बुवाई 1,016.57 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। भले ही यह पिछले साल के आंकड़ों से थोड़ा कम है, लेकिन अगस्त में मानसून की अनियमित बारिश के बावजूद यह सामान्य स्तरों के करीब है। इन फसलों का प्रदर्शन घरेलू खाद्य आपूर्ति और महंगाई के लिए काफी महत्वपूर्ण है, जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की भी नजर रहती है।

वहीं, ग्लोबल मार्केट में सोने (Gold) में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। दो महीने के आउटफ्लो के बाद, जुलाई 2026 के दौरान ग्लोबल गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में $3 बिलियन का नेट इनफ्लो हुआ है। यह दिखाता है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, ग्लोबल निवेशक इसे अपने पोर्टफोलियो का एक अहम हिस्सा मान रहे हैं। यह ट्रेंड बताता है कि निवेशक ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताओं के बीच सेफ-हेवन एसेट्स पर फोकस बनाए हुए हैं। आगे चलकर, निवेशक इस बात पर ध्यान देंगे कि क्या नए SLB कॉन्ट्रैक्ट्स क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में लिक्विडिटी की कमी को पूरा करते हैं और आने वाली तिमाहियों में खरीफ की फसल की कटाई खुदरा खाद्य कीमतों को कैसे प्रभावित करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.