ICCT की नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। साल **2025** में Gurugram में ट्रैफिक पॉल्यूशन की वजह से बच्चों के करीब **95,000** स्कूल दिन खराब हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, पुरानी गाड़ियों पर बैन का असर कम है और अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर शिफ्ट होना मजबूरी बन गया है।
आंकड़ों की हकीकत
International Council on Clean Transportation (ICCT) की हालिया रिपोर्ट, जो 5 अक्टूबर, 2026 को जारी की गई, ने शहर की हवा की खराब स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 94,859 स्कूल डेज का नुकसान हुआ है, जो 431 बच्चों के पूरे एकेडमिक ईयर के बराबर है। चौंकाने वाली बात यह है कि युवाओं में अस्थमा के हर 4 में से 1 नया मामला सीधे तौर पर व्हीकल एग्जॉस्ट से जुड़ा है।
क्यों फेल हो रही हैं मौजूदा नीतियां?
प्रशासन का ध्यान पुरानी गाड़ियों पर बैन लगाने पर है, लेकिन ICCT का डेटा कुछ और ही कहता है। वर्तमान में ट्रैफिक से होने वाले कुल पॉल्यूशन का 80% हिस्सा नए BS IV और BS VI मॉडल से आ रहा है। इसका मतलब है कि सिर्फ उम्र के आधार पर बैन लगाना प्रदूषण को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।
निवेशकों और पॉलिसी मेकर्स के लिए संकेत
Gurugram में प्रति 1,000 निवासियों पर 323 गाड़ियां हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का एडॉप्शन अभी भी सिर्फ 4.3% है। अब फोकस इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और इलेक्ट्रिक बसों पर शिफ्ट हो सकता है। Commission for Air Quality Management (CAQM) के साथ मिलकर सरकार जल्द ही नई रीजनल स्ट्रेटजी बना सकती है।
निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में काम कर रही हैं। सरकारी सब्सिडी और पॉलिसी में बदलाव ऑटोमोबाइल सेक्टर के डिमांड पैटर्न को पूरी तरह बदल सकता है।
