गुजरात में बब्बर शेरों पर संकट: बीमारियों के कारण एक साल में **62** एशियाई शेरों की मौत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
गुजरात में बब्बर शेरों पर संकट: बीमारियों के कारण एक साल में **62** एशियाई शेरों की मौत

गुजरात सरकार ने विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। पिछले एक साल में बीमारियों के चलते **62** एशियाई शेरों (Asiatic Lions) की जान चली गई है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

शेरों की मौत का कारण क्या है?

राज्य विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक की 12 महीने की अवधि में इन मौतों की पुष्टि हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स से पता चला है कि मौत के प्रमुख कारणों में सेप्टीसीमिया, निमोनिया, एनीमिया और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। इसके अलावा, पैरासाइट इन्फेक्शन और नर्वस सिस्टम से जुड़ी जटिलताओं ने भी शेरों की सेहत को भारी नुकसान पहुंचाया है।

सरकार ने उठाए कड़े कदम

बढ़ती मौतों को देखते हुए गुजरात वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हेल्थ मैनेजमेंट स्ट्रेटजी को और तेज कर दिया है। अब शेरों के आवास के आसपास रहने वाले पशुओं का बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन किया जा रहा है ताकि संक्रमण को जंगली जानवरों तक पहुंचने से रोका जा सके। इसके अलावा डीवॉर्मिंग और टिक-रिमूवल (किल्ली निकालने) के विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इमरजेंसी के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर

सरकार ने मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए सासन, जामवाला और जूनागढ़ के सक्करबाग चिड़ियाघर में नई सुविधाएं शुरू की हैं। अब शेरों के लिए डेडिकेटेड 'लायन एम्बुलेंस' सेवा भी तैनात की गई है, जिससे बीमार या घायल शेरों को तुरंत इलाज के लिए शिफ्ट किया जा सके।

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 की जनगणना के अनुसार राज्य में एशियाई शेरों की कुल संख्या 891 है। हालांकि यह चिंता का विषय है, लेकिन वन विभाग की टीमें अब पहले से कहीं अधिक सतर्क होकर शेरों की मॉनिटरिंग कर रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.