Guidance Tamil Nadu ने लाइफ साइंसेज, केमिकल्स और फायरवर्क्स जैसे प्रमुख सेक्टर्स के साथ बैठकें की हैं। इसका मकसद राज्य की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी को तैयार करना है, जो इन ज़रूरी इंडस्ट्रीज के लिए रेगुलेटरी प्रोसेस को आसान बनाएगी और इन्वेस्टमेंट इंसेंटिव्स को बेहतर करेगी। यह कंसल्टेशन इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के साथ हुई पिछली बैठक के बाद दूसरा राउंड है।
Guidance Tamil Nadu, जो राज्य की इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी है, ने गुरुवार को विभिन्न इंडस्ट्रियल स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लेने के लिए एक औपचारिक कंसल्टेशन सेशन आयोजित किया। इस चर्चा का मुख्य फोकस नई स्टेट इंडस्ट्रियल पॉलिसी का मसौदा तैयार करना था, जिसमें लाइफ साइंसेज, केमिकल्स, फायरवर्क्स और रेयर अर्थ जैसे सेक्टर्स पर विशेष ज़ोर दिया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य रेगुलेटरी सुधारों और वित्तीय इंसेंटिव्स के ज़रिए इन इंडस्ट्रीज को सरकार से मिलने वाले सपोर्ट को बेहतर बनाना है।
फोकस में सेक्टर्स और स्टेकहोल्डर्स
इस कंसल्टेशन में तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (TANFAMA), केमिकल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, मनाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ तमिलनाडु मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (ATMED), और इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IDMA) जैसे कई इंडस्ट्री ग्रुप्स शामिल हुए। इन संगठनों ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए, खासकर राज्य के डिजिटल सिंगल-विंडो क्लीयरेंस पोर्टल को और मज़बूत करने पर। इन समूहों को शामिल करके, राज्य सरकार का लक्ष्य मैन्युफैक्चरर्स के सामने आने वाली लाइसेंसिंग, कंप्लायंस और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी खास दिक्कतों को दूर करना है।
पॉलिसी के लक्ष्य और इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट
इन सेक्टर्स में काम करने वाले इन्वेस्टर्स और कंपनियों के लिए, इस पॉलिसी को बनाने का मुख्य लक्ष्य तमिलनाडु को एक इंडस्ट्रियल हब के तौर पर और ज़्यादा कॉम्पिटिटिव बनाना है। इंडस्ट्री सेक्रेटरी एस विजयकुमार और Guidance Tamil Nadu के एमडी और सीईओ दीपक जैकब ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई पॉलिसी इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मज़बूत करने और उभरते सेक्टर्स को सपोर्ट करने पर केंद्रित होगी। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण का मकसद इंसेंटिव स्ट्रक्चर्स पर लॉन्ग-टर्म क्लैरिटी देना है, जो राज्य में कैपिटल स्पेंडिंग या कैपेसिटी बढ़ाने की योजना बना रही कंपनियों के लिए एक बड़ा फैक्टर है।
तमिलनाडु का ऐतिहासिक रूप से केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में मज़बूत स्थान रहा है, खासकर मनाली जैसे इलाकों में जहाँ कई बड़े केमिकल और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स हैं। इस नई पॉलिसी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इन इंडस्ट्री की सिफारिशों को कितने प्रभावी ढंग से एक्शन-ओरिएंटेड रिफॉर्म्स में बदल पाती है, खासकर रेगुलेटरी अप्रूवल के लिए लगने वाले समय को कम करने और लैंड एक्विजिशन प्रोसेस को सुव्यवस्थित करने में। इन्वेस्टर्स को फाइनल की गई पॉलिसी फ्रेमवर्क से जुड़ी भविष्य की घोषणाओं पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये डिटेल्स नए इंसेंटिव्स के दायरे और भविष्य में प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन की आसानी को तय करेंगे।
