Greenr Sustainability Accelerator ने भारतीय क्लाइमेट स्टार्टअप्स को स्केल करने के लिए **$3 करोड़** (लगभग **₹250 करोड़**) की नई फंडिंग जुटाने की योजना बनाई है। IKEA और Visa फाउंडेशन समर्थित यह प्रोग्राम अब पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर रेवेन्यू-ड्रिवेन ग्रोथ पर फोकस करेगा।
हाइब्रिड फंडिंग मॉडल से मिलेगी ताकत
पारंपरिक स्टार्टअप इनक्यूबेटर्स के उलट, Greenr एक हाइब्रिड निवेश मॉडल का उपयोग कर रहा है। इसमें 70% इक्विटी, 20% ग्रांट और 10% डेट शामिल है। इस स्ट्रक्चर का उद्देश्य स्टार्टअप्स की जरूरतों के हिसाब से उन्हें फंड उपलब्ध कराना है, ताकि वे आरएंडडी (R&D) से लेकर प्रोडक्शन स्केल करने तक की प्रक्रिया को आसान बना सकें। अब तक कुल फंडिंग में 42% हिस्सा 'वेस्ट-टू-वैल्यू' बिजनेस को और 24% हिस्सा एग्रीकल्चर स्टार्टअप्स को मिला है।
कमर्शियल सफलता पर जोर
इस नए फंडिंग राउंड का मुख्य लक्ष्य स्टार्टअप्स को मुनाफे वाला बिजनेस मॉडल तैयार करने में मदद करना है। हाल ही में लागू हुए 'Extended Producer Responsibility' (EPR) नियमों ने इन स्टार्टअप्स के लिए नई संभावनाएं खोल दी हैं। उदाहरण के तौर पर, Plastroots जैसी कंपनियों ने इन नियमों का लाभ उठाकर अपना एनुअल रेवेन्यू ₹3 करोड़ के पार पहुंचा दिया है।
शानदार ग्रोथ का रिकॉर्ड
प्रोग्राम का फोकस ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर है। Brisil Technologies ने अपने डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल में सुधार कर अप्रैल 2023 से अगस्त 2024 के बीच अपना मंथली रेवेन्यू 10 गुना बढ़ा लिया है। कुल मिलाकर, इस प्रोग्राम से जुड़ी कंपनियों ने जुड़ने के बाद से औसत 51% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। यह रुझान बताता है कि भारतीय क्लाइमेट-टेक सेक्टर अब एक्सपेरिमेंट से आगे बढ़कर एक मैच्योर बिजनेस इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है।
