Green Portfolio CIO Anuj Jain: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बंपर ग्रोथ, RBI के नए नियमों का असर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Green Portfolio CIO Anuj Jain: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बंपर ग्रोथ, RBI के नए नियमों का असर

Green Portfolio के CIO, Anuj Jain का मानना है कि सरकार के खर्च और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के सहारे FY27 की दूसरी छमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, खासकर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स स्टॉक्स पर भरोसा जताया है, जबकि RBI के नए मार्जिन नियमों से शॉर्ट-टर्म सट्टेबाजी पर लगाम लगने की उम्मीद है।

क्या है खास?

Green Portfolio के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर, Anuj Jain ने भारतीय इक्विटी मार्केट्स में नई जान आने की बात कही है। उनके अनुसार, नए क्लाइंट्स की भागीदारी बढ़ी है और प्राइमरी मार्केट में भी रौनक लौटी है। Jain को उम्मीद है कि FY27 की दूसरी छमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ तेज होगी। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, जिससे महंगाई और रुपये को सहारा मिलेगा। साथ ही, सरकारी खर्च लगातार जारी है और प्राइवेट सेक्टर में भी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

Jain मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर काफी बुलिश (Bullish) हैं। उनका कहना है कि सरकारी पहलों, जैसे प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स और इलेक्ट्रॉनिक्स व डिफेंस के क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' पर जोर, इस सेक्टर के लिए बड़े मौके खोल रहे हैं। इसके अलावा, चीन से सप्लाई चेन (Supply Chain) का दूसरी देशों में शिफ्ट होना भी भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। Jain खासतौर पर डिफेंस, कैपिटल गुड्स (Capital Goods), इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो कंपोनेंट्स जैसी कंपनियों पर नजर रख रहे हैं, जिनके पास बड़े ऑर्डर बुक हैं और वे समय पर प्रोजेक्ट्स पूरे करने का ट्रैक रिकॉर्ड रखती हैं।

RBI के मार्जिन नियमों का असर

RBI द्वारा हाल ही में मार्जिन की आवश्यकताओं को लेकर लाए गए नियम, बाजार की स्थिरता के लिए एक सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं। ये नियम ट्रेडर्स द्वारा उधार लिए गए पैसे के इस्तेमाल को सीमित करते हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म सट्टेबाजी (Speculative Trading) में लगने वाली लिक्विडिटी (Liquidity) कम होने की उम्मीद है। भले ही इससे NSE और BSE पर डेरिवेटिव्स (Derivatives) के वॉल्यूम में कमी आ सकती है, लेकिन Jain का मानना है कि इससे निवेशक हाई-रिस्क वाले शॉर्ट-टर्म दांव की बजाय लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन (Wealth Creation) पर ज्यादा ध्यान देंगे। इसका असर डोमेस्टिक प्रोप्राइटरी फर्म्स (Domestic Proprietary Firms) पर फॉरेन हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स (Foreign High-Frequency Traders) की तुलना में ज्यादा देखने को मिल सकता है।

अर्निंग्स और ग्लोबल फ्लो का अनुमान

June तिमाही की अर्निंग्स (Earnings) को लेकर Jain का अनुमान है कि सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण कई इंडस्ट्रीज पर मार्जिन प्रेशर (Margin Pressure) देखने को मिल सकता है। हालांकि, मैनेजमेंट की ओर से नियर-टर्म (Near-term) में कुछ सावधानी बरती जा सकती है, पर कुल मिलाकर अर्निंग्स का साइकिल मजबूत बना रहेगा। ग्लोबल स्तर पर, AI-लिंक्ड स्टॉक्स (AI-linked Stocks) में भारी निवेश के कारण प्रॉफिट-टेकिंग (Profit-taking) हो सकती है। इससे फंड्स का एक हिस्सा भारत की ओर वापस आ सकता है, खासकर अगर ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स (Interest Rates) में गिरावट जारी रहती है और जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risks) कम होते हैं। इससे फॉरेन इन्वेस्टर्स (Foreign Investors) की ओर से 2026 की पहली छमाही में देखी गई नेट सेलिंग (Net Selling) ट्रेंड उलट सकती है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में PLI-संबंधित प्रोजेक्ट्स की प्रगति और ऑर्डर एग्जीक्यूशन रेट (Order Execution Rate) पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये सीधे भविष्य के रेवेन्यू ग्रोथ को प्रभावित करेंगे। इसके अलावा, डेरिवेटिव्स वॉल्यूम और FII फ्लो डेटा (FII Flow Data) के ट्रेंड को समझना भी जरूरी होगा, ताकि यह पता चल सके कि नए मार्जिन नियमों और बदलते ग्लोबल सेंटीमेंट (Global Sentiment) के जवाब में मार्केट पार्टिसिपेशन (Market Participation) कैसे बदलता है।

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