वाटर टेक्नोलॉजी कंपनी Gradiant ने अगले 3 सालों में **$1 बिलियन** का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। AI डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी कोयंबटूर में अपनी इंजीनियरिंग टीम को दोगुना कर रही है। ध्यान दें, Gradiant एक प्राइवेट कंपनी है और यह शेयर बाजार (NSE/BSE) में लिस्टेड नहीं है।
ग्लोबल डिमांड का फायदा
वाटर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वाली Gradiant अब अपनी नजरें $1 बिलियन के सालाना रेवेन्यू पर टिकाए हुए है। कंपनी फिलहाल $500 मिलियन से $750 मिलियन के दायरे में काम कर रही है। इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए कंपनी पूरी तरह से AI और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दांव लगा रही है, क्योंकि इन सेक्टरों को कूलिंग और हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेस के लिए बड़े पैमाने पर पानी की जरूरत होती है।
कोयंबटूर सेंटर की बड़ी भूमिका
कंपनी ने अपने ग्लोबल इंजीनियरिंग ऑपरेशंस के लिए भारत को मुख्य केंद्र बनाया है। कोयंबटूर स्थित 'ग्लोबल इंजीनियरिंग सेंटर' का विस्तार किया जा रहा है, जिससे यहां तकनीकी पेशेवरों की संख्या 200 से ज्यादा हो जाएगी। यह सेंटर प्रोजेक्ट डिजाइन और एग्जीक्यूशन का मुख्य केंद्र है।
फंडिंग और मार्केट का गणित
मई 2026 में कंपनी ने अपनी सीरीज-ई फंडिंग पूरी की थी, जिसमें इसकी वैल्यूएशन $2 बिलियन आंकी गई थी। इस राउंड में Safar Partners और Hostplus Superannuation Fund जैसे बड़े निवेशकों ने हिस्सा लिया था। हालांकि, कंपनी भविष्य में IPO ला सकती है, लेकिन फिलहाल यह पूरी तरह से प्राइवेट कैपिटल पर निर्भर है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Gradiant में सीधे निवेश का कोई रास्ता नहीं है। यह स्टॉक NSE या BSE पर ट्रेड नहीं होता है। हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि पानी के मैनेजमेंट से जुड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ने से जुड़ी हुई बड़ी लिस्टेड इंजीनियरिंग और यूटिलिटी कंपनियों पर इसका सकारात्मक असर दिख सकता है।
रिस्क फैक्टर
विकास की रफ्तार के बीच, Gradiant को चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल अस्थिरता के कारण कंपनी ने पहले 20% तक रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की थी। भविष्य में कंपनी की परफॉर्मेंस अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स को सुरक्षित और समय पर पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
