Indian Passport: नागरिकता का पक्का सबूत नहीं, सरकार ने दी बड़ी सफाई

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Passport: नागरिकता का पक्का सबूत नहीं, सरकार ने दी बड़ी सफाई

भारत सरकार ने साफ किया है कि भले ही भारतीय पासपोर्ट नागरिकों को जारी किए जाते हैं, लेकिन ये नागरिकता का निर्णायक कानूनी प्रमाण नहीं माने जाते। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत ये मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज के तौर पर काम करते हैं। सरकार ने दोहरी नागरिकता के खिलाफ अपनी पुरानी नीति को भी दोहराया है, जिसके तहत विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता तुरंत समाप्त हो जाती है।

पासपोर्ट का मकसद और नागरिकता का प्रमाण

विदेश मंत्रालय ने भारतीय पासपोर्ट की प्रकृति और कानूनी स्थिति को लेकर एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। विदेश राज्य मंत्री, श्री Kirti Vardhan Singh ने संसद में लिखित जवाब में इस बात पर जोर दिया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत निर्धारित एक व्यवस्थित सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही यह खास तौर पर भारतीय नागरिकों को जारी किए जाते हैं।

सरकार ने यह दोहराया है कि केवल भारतीय नागरिक ही पासपोर्ट के हकदार हैं। हालांकि, इसे नागरिकता का 'अंतिम प्रमाण' (conclusive proof) मानने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य एक यात्रा दस्तावेज के रूप में काम करना है, जो भारतीय नागरिकों को देश से बाहर जाने के लिए नियंत्रित करता है। इस तरह, सरकार एक यात्रा अनुमति जारी करने की प्रशासनिक प्रक्रिया और राष्ट्रीयता की व्यापक कानूनी स्थिति के बीच अंतर स्पष्ट करती है, जो अलग संवैधानिक और विधायी ढांचों के तहत नियंत्रित होती है।

दोहरी नागरिकता पर सरकार का रुख

नागरिकता के व्यापक संदर्भ में, सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत दोहरी नागरिकता की सख्ती से मनाही करता है। नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है, वह तुरंत अपनी भारतीय नागरिकता खो देता है। परिणामस्वरूप, ऐसे व्यक्ति का भारतीय पासपोर्ट विदेशी नागरिकता प्राप्त करने पर अमान्य हो जाता है। यह स्थिति भारत की नागरिकता नीति का एक मुख्य पहलू बनी हुई है, जो यह सुनिश्चित करती है कि भारतीय राष्ट्रीयता से जुड़े कानूनी दायित्व और अधिकार विशेष रहें।

निवेशक और आम नागरिक अक्सर ऐसे दस्तावेजों पर स्पष्टता चाहते हैं, खासकर पहचान और निवास की आवश्यकताओं पर चल रही चर्चाओं को देखते हुए। फिलहाल, सरकार का रुख स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट रखना एक सत्यापित भारतीय नागरिक होने का परिणाम है, लेकिन यह दस्तावेज़ स्वयं कानूनी या न्यायिक संदर्भों में राष्ट्रीयता के सर्व-समावेशी प्रमाण के रूप में कार्य नहीं करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.