सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) नेशनल हाईवे के लिए एक नया परफॉर्मेंस रेटिंग सिस्टम ला रहा है। अब हाईवे की क्वालिटी, सेफ्टी और टोल सर्विस के आधार पर उनकी रैंकिंग होगी, जिसका सीधा असर सड़क निर्माण और मेंटेनेंस कंपनियों के कारोबार पर पड़ेगा।
सरकार अब नेशनल हाईवे की निगरानी को डेटा-आधारित (Data-driven) बनाने जा रही है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) द्वारा पेश किया गया यह नया रेटिंग सिस्टम हाईवे की एफिशिएंसी, सड़क सुरक्षा (Road Safety) और टोल प्लाजा पर मिलने वाली सेवाओं के आधार पर कॉरिडोर को ग्रेड देगा।
इंफ्रा सेक्टर के लिए क्या बदल रहा है?
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। पहले सरकारी खर्च और कंपनियों का फोकस मुख्य रूप से सड़क बनाने (Construction) पर रहता था, लेकिन अब फोकस 'ऑपरेशनल क्वालिटी' और 'लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस' पर शिफ्ट हो गया है। जो कंपनियां सुरक्षा और दक्षता के उच्च मानकों को पूरा करेंगी, उन्हें लंबी अवधि में फायदा मिल सकता है, जबकि खराब रेटिंग वाली कंपनियों को कड़ी जांच का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर असर
सड़क बनाने वाली कंपनियां अक्सर HAM (Hybrid Annuity Model) या BOT (Build-Operate-Transfer) मॉडल पर काम करती हैं। इन कॉन्ट्रैक्ट्स में रेवेन्यू अक्सर सड़क की उपलब्धता और मेंटेनेंस से जुड़ा होता है। सख्त ग्रेडिंग का मतलब है कि अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों को भविष्य के टेंडर हासिल करना आसान होगा, जबकि खराब परफॉर्मेंस वाली कंपनियां पेनल्टी या ऑपरेशनल चुनौतियों में फंस सकती हैं।
कौन सी कंपनियां रडार पर?
यह नया सिस्टम सीधे तौर पर IRB Infrastructure, Dilip Buildcon, KNR Constructions, PNC Infratech और HG Infra Engineering जैसी बड़ी कंपनियों के कामकाज को प्रभावित करेगा। यह रेटिंग सिस्टम 10 किलोमीटर के दायरे में होने वाली दुर्घटनाओं और टोल पर होने वाली भीड़ (Congestion) जैसे डेटा पॉइंट्स को ट्रैक करेगा।
अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये रेटिंग्स भविष्य के सरकारी टेंडर्स के साथ जुड़ेंगी और क्या इनसे कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट पर कोई अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
