ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs ने भारतीय शेयर बाजार के लिए एक पॉजिटिव आउटलुक पेश किया है। फर्म का अनुमान है कि निफ्टी इंडेक्स जून **2027** तक **26,500** के स्तर को छू सकता है। यह मौजूदा स्तरों से लगभग **10%** की तेजी का संकेत देता है।
विदेशी बिकवाली का दौर खत्म?
Goldman Sachs का मानना है कि 2026 की पहली छमाही में भारतीय बाजार से लगभग 30 अरब डॉलर की विदेशी बिकवाली हुई है, और अब यह दौर थमने की कगार पर है। इसी के साथ, निफ्टी में 9% तक की गिरावट का सामना करने के बाद, फर्म अब 2027 के मध्य तक इंडेक्स के 26,500 तक पहुंचने की उम्मीद कर रही है।
लार्ज-कैप वैल्यू स्टॉक्स की ओर झुकाव
Goldman Sachs ने बाजार में लीडरशिप बदलने की ओर इशारा किया है। 2026 की पहली छमाही में ग्रोथ स्टॉक्स और मिड-कैप कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन अब फर्म का मानना है कि लार्ज-कैप वैल्यू स्टॉक्स का समय आने वाला है। ये स्टॉक्स फिलहाल मिड-कैप की तुलना में वैल्यूएशन डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे हैं, और इनमें विदेशी हिस्सेदारी एक दशक के निचले स्तर पर है। ऐसे में, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में दोबारा निवेश करेंगे, तो ये लार्ज-कैप स्टॉक्स फायदे में रह सकते हैं।
सेक्टर्स पर क्या है राय?
ब्रोकरेज फर्म ने बैंकिंग सेक्टर पर 'ओवरवेट' रेटिंग बरकरार रखी है। फाइनेंशियल स्टॉक्स को विदेशी बिकवाली की मार झेलनी पड़ी थी, जिसमें लगभग 12 अरब डॉलर का आउटफ्लो हुआ। लेकिन फर्म का कहना है कि मौजूदा वैल्यूएशन और हल्की पोजीशनिंग के कारण, अगर विदेशी निवेश लौटता है तो यह सेक्टर रिकवरी के लिए सबसे आगे होगा। यूटिलिटी सेक्टर को भी 'ओवरवेट' किया गया है, क्योंकि बदलते मौसम के पैटर्न से बिजली की मांग बढ़ सकती है। वहीं, आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट-हैवी सेक्टर्स पर कंपनी सतर्क रहने की सलाह दे रही है और घरेलू मांग पर फोकस करने वाली कंपनियों को तरजीह देने की बात कह रही है।
रिकवरी के लिए खास थीम
सेक्टर्स के अलावा, Goldman Sachs ने आने वाले महीनों के लिए टूरिज्म और एनर्जी को खास थीम के तौर पर चिन्हित किया है। टूरिज्म स्टॉक्स में तेजी की उम्मीद है क्योंकि एयरलाइन ऑपरेटिंग कॉस्ट स्थिर हो रही है और घरेलू यात्रा की मांग बनी हुई है। एनर्जी सेक्टर में, फर्म रिफाइनिंग और एक्सप्लोरेशन से जुड़ी कंपनियों को पसंद कर रही है। हालांकि, सीमेंट, केमिकल्स, मेटल और माइनिंग जैसे सेक्टर्स पर घरेलू कीमतों और मांग की स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। निवेशकों को एफआईआई (FII) के फ्लो पर नजर रखनी चाहिए, जो बाजार के सेंटिमेंट को समझने में अहम भूमिका निभाएंगे।
