Goa ने अपनी नई AI Policy 2026 का ऐलान कर दिया है। सरकार का मकसद टूरिज्म पर निर्भरता कम करना और राज्य को एक बड़ा इनोवेशन हब बनाना है। इस मिशन के लिए **₹250 करोड़** का फंड रखा गया है और **2030** तक **50,000** युवाओं को ट्रेन करने का टारगेट है।
टूरिज्म से टेक की ओर कदम
गोवा सरकार ने अक्टूबर 2026 में हुए 'Goa AI Tech Conclave' में अपनी महत्वाकांक्षी AI Policy पेश की है। राज्य की GDP में टूरिज्म का हिस्सा करीब 16% है, जिसे और अधिक डायवर्सिफाई करने के लिए सरकार ने अगले 5 साल में ₹250 करोड़ का इनोवेशन फंड आवंटित किया है। यह पैसा स्टार्टअप्स, बुनियादी ढांचे और रिसर्च प्रोजेक्ट्स में खर्च किया जाएगा।
BITS Pilani के साथ साझेदारी
इस मिशन की नींव BITS Pilani Goa के साथ मिलकर बने 'AI Centre of Excellence' से रखी जा रही है। यहाँ 'हेरिटेज इंटेलिजेंस' पर जोर दिया जाएगा, जिससे ऐतिहासिक जगहों को डिजिटल रूप में बेहतर ढंग से पेश किया जा सके। इसके अलावा, Bhashini के साथ मिलकर Konkani समेत कई भाषाओं के लिए AI टूल्स तैयार किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय दुकानदारों और टूरिस्टों के बीच भाषा की बाधा खत्म हो सके।
चुनौतियां और भविष्य
सरकार का लक्ष्य केवल डिजिटल नोमैड्स को आकर्षित करना नहीं, बल्कि 'Work from Goa' मॉडल को एक स्थाई इकोनॉमी में बदलना है। हालांकि, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े टेक हब से मिल रही कड़ी टक्कर एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। साथ ही, डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी के मोर्चे पर सरकार को कड़े ऑडिटिंग नियमों की जरूरत होगी।
इन्वेस्टर्स और बाजार के जानकारों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि सरकार अगले कुछ क्वार्टर्स में इस फंड को कैसे इस्तेमाल करती है और प्राइवेट सेक्टर से कितना निवेश जुटा पाती है।
