Go First Liquidation: संपत्ति बिक नहीं रही, अब रिजर्व प्राइस में **34%** तक की भारी कटौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
Go First Liquidation: संपत्ति बिक नहीं रही, अब रिजर्व प्राइस में **34%** तक की भारी कटौती

बंद पड़ी एयरलाइन Go First की लिक्विडेशन प्रक्रिया में बड़ी बाधा आ रही है। खरीदार न मिलने के कारण लिक्विडेटर ने अब थाणे की जमीन और एविएशन इक्विपमेंट के रिजर्व प्राइस में **34%** तक की बड़ी कटौती कर दी है, जिससे कर्जदाताओं की रिकवरी मुश्किल में दिख रही है।

Go First (पूर्व में GoAir) की दिवाला और लिक्विडेशन की राह बेहद कठिन साबित हो रही है। नीलामी की बार-बार कोशिशों के बावजूद खरीदार सामने नहीं आ रहे हैं, जिससे लिक्विडेटर को मजबूरन एसेट्स के दाम घटाने पड़े हैं। यह बाजार में अनुमानित वैल्यूएशन और खरीदारों की असल मांग के बीच के बड़े अंतर को दिखाता है।\n\n### थाणे की जमीन और उपकरणों पर असर\n\nकंपनी की सबसे बड़ी संपत्ति, थाणे में स्थित 95 एकड़ जमीन को बेचने की कोशिशें नाकाम रही हैं, जबकि इसका रिजर्व प्राइस 30% घटाकर ₹1,375 करोड़ कर दिया गया था। इसके अलावा, केबिन कैटरिंग ट्रॉलियों जैसे ऑपरेशनल एसेट्स के रिजर्व प्राइस में लगभग 34% की कटौती की गई है। पुशबैक ट्रैक्टर, ग्राउंड पावर यूनिट्स और कोच जैसे ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट के दाम भी करीब 19% तक कम कर दिए गए हैं।\n\n### कर्जदाताओं के लिए बढ़ी चुनौती\n\nकंपनी पर कुल देनदारी ₹11,000 करोड़ से ज्यादा है, जिसमें से फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को ₹6,521 करोड़ वसूलने हैं। रिकवरी पूरी तरह से बची हुई इन्वेंट्री की बिक्री पर टिकी है, लेकिन स्पेशलाइज्ड एविएशन एसेट्स के लिए खरीदार न मिलना बैंकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।\n\nयह स्थिति Kingfisher Airlines के पुराने मामले की याद दिलाती है, जहां Kingfisher House जैसे एसेट्स को अंततः मूल रिजर्व प्राइस से 65% के डिस्काउंट पर बेचना पड़ा था। अब सबकी निगाहें अगली नीलामी राउंड पर टिकी हैं कि क्या इन नई कीमतों पर खरीदार मिलते हैं या रिकवरी की उम्मीदें और धुंधली होंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.