Marriott, Hilton और IHG जैसे ग्लोबल होटल ब्रांड्स भारत में तेजी से अपना नेटवर्क फैला रहे हैं। लग्जरी और वेलनेस टूरिज्म की बढ़ती डिमांड को भुनाने की कोशिश जारी है, लेकिन ओवरसप्लाई का खतरा निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर फिलहाल अपने स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है। लग्जरी, वेलनेस और एक्सपीरिएंशियल ट्रैवल की बढ़ती मांग को देखते हुए Marriott International, Hilton और IHG Hotels & Resorts जैसे दिग्गज अपने पोर्टफोलियो को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहे हैं।
साल 2025 में होटल साइनिंग्स का आंकड़ा 64,000 कीज (Keys) के पार पहुंच गया है। सेक्टर में निवेश की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2025 में इंडस्ट्री ट्रांजेक्शंस $567 मिलियन रहे और साल 2026 तक इनके $1 बिलियन के पार जाने का अनुमान है।
एसेट-लाइट मॉडल की रणनीति
ये कंपनियां अब भारी निवेश के बजाय 'एसेट-लाइट मॉडल' पर फोकस कर रही हैं। IHG ने Adani Airport Holdings के साथ साझेदारी की है, ताकि एयरपोर्ट हब्स के पास होटल विकसित किए जा सकें। वहीं, Marriott का लक्ष्य भारत को कुछ ही सालों में अपना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट बनाने का है। फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट्स के जरिए ये कंपनियां बिना जमीन खरीदे और बिना कंस्ट्रक्शन के भारी बोझ के अपने ब्रांड और ऑपरेशंस को तेजी से फैला रही हैं।
ग्रोथ बनाम बाजार के जोखिम
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में इंडस्ट्री की रेवेन्यू ग्रोथ 7% से 9% रहने का अनुमान है, जबकि प्रीमियम ऑक्यूपेंसी 72% से 74% के बीच स्थिर बनी हुई है। लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू भी है। वर्तमान में पाइपलाइन में 1,14,000 से ज्यादा कमरे हैं, जिससे 'ओवरसप्लाई' का खतरा बढ़ गया है। यदि सप्लाई मांग से ज्यादा हुई, तो रूम रेंट्स और ऑक्यूपेंसी पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, महंगाई और बढ़ते फ्यूल कॉस्ट से लोगों का ट्रैवल बजट प्रभावित हो सकता है, जो लग्जरी सेगमेंट के लिए एक चुनौती है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या नए होटलों की सप्लाई के मुकाबले डिमांड उसी रफ्तार से बढ़ पाएगी या नहीं। साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहरों में सर्विस क्वालिटी बनाए रखना और कुशल मैनपावर ढूंढना इन ग्लोबल ब्रांड्स के लिए प्रॉफिटेबिलिटी का सबसे बड़ा पैमाना होगा।
