Global Education Standards: दुनिया भर में शिक्षा का स्तर 25 साल के निचले स्तर पर, AI का बढ़ा खतरा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Global Education Standards: दुनिया भर में शिक्षा का स्तर 25 साल के निचले स्तर पर, AI का बढ़ा खतरा

OECD की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में छात्रों का गणित और रीडिंग प्रदर्शन पिछले **25** वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और AI का गलत इस्तेमाल इसके मुख्य कारण हैं, जो ग्लोबल एजुकेशन और EdTech सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है।

25 साल की सबसे बड़ी गिरावट

ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) की 8 सितंबर, 2026 की PISA रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के एजुकेशन सेक्टर को हिलाकर रख दिया है। 91 देशों में किए गए इस सर्वे में 15 साल के छात्रों के गणित और रीडिंग स्कोर 25 साल के न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। 2015 से 2025 के बीच रीडिंग में 28 पॉइंट और गणित में 22 पॉइंट की गिरावट दर्ज की गई है।

क्यों बिगड़ रहे हैं नतीजे?

रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि इसका मुख्य कारण तकनीक का गलत इस्तेमाल है। करीब 30% छात्र साइंस क्लास के दौरान डिजिटल गैजेट्स में खोए रहते हैं। इसके अलावा, बिना सही गाइडेंस के AI टूल्स का उपयोग करने वाले छात्रों का प्रदर्शन काफी खराब पाया गया है, जिसे 'AI डिवाइड' का नाम दिया गया है।

शिक्षा में खर्च और दक्षता (Efficiency) का गणित

OECD का डेटा एक बड़ा सच सामने लाता है: शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने से बेहतर नतीजे नहीं मिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति छात्र $85,000 के खर्च के बाद बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कम हो जाती है। यानी समस्या फंडिंग की नहीं, बल्कि एजुकेशन डिलीवरी और डिजिटल टूल्स के सही मैनेजमेंट की है।

भारत और NEP 2020 का महत्व

भारत भले ही इस सर्वे का हिस्सा नहीं था, लेकिन भारतीय EdTech सेक्टर और 'नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020' के लिए यह सबक है। अब फोकस सिर्फ कंटेंट डिलीवरी पर नहीं, बल्कि छात्रों की लर्निंग क्वालिटी, फाउंडेशनल लिटरेसी और क्रिटिकल थिंकिंग को मजबूत करने पर होना चाहिए। भविष्य का वर्कफोर्स तैयार करने के लिए अब रटने के बजाय एनालिटिकल स्किल्स को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.