गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में 12 जुलाई को एक 22 वर्षीय युवक की पुलिस बूथ के बाहर गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई। देरी से चिकित्सा सहायता मिलने के आरोपों के बाद स्थानीय अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। पुलिस वर्तमान में घटनाओं के क्रम और घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों की प्रतिक्रिया समय की समीक्षा कर रही है।
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां 22 वर्षीय युवक राजकुमार की गंभीर चोटों के बाद मौत हो गई। यह घटना 12 जुलाई को एक पुलिस पिंक बूथ के बाहर हुई, जिसने आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल और सार्वजनिक सुरक्षा सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कथित देरी की जांच
मृतक के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि गंभीर रूप से घायल और काफी खून बहने के बावजूद, पुलिस सुविधा के इतने करीब होने के बावजूद पीड़ित को तत्काल मदद नहीं मिली। परिवार का दावा है कि बूथ के बाहर शीशे टूटने से पीड़ित को चोटें आईं, जब उसका ऑटो-रिक्शा चालक के साथ विवाद हुआ था। लापरवाही के इन आरोपों की अब आधिकारिक जांच की जा रही है।
पुलिस का पक्ष
गाजियाबाद पुलिस ने घटनाओं के सटीक क्रम का पता लगाने के लिए एक औपचारिक जांच शुरू की है। सहायक पुलिस आयुक्त (कविनगर) उपासना पांडे ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि विवाद के समय पीड़ित और ऑटो-रिक्शा चालक दोनों नशे में थे। यह विवाद कथित तौर पर एक वित्तीय मामले को लेकर हुआ था। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को इलाज के लिए एक चिकित्सा सुविधा में ले जाया गया था, जहां दुर्भाग्य से उसने दम तोड़ दिया।
डीसीपी सिटी धवल जैसवाल ने पुष्टि की है कि एक विशेष टीम मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस जांच में पुलिस के आचरण, आपातकालीन प्रतिक्रिया की गति और सार्वजनिक डोमेन में प्रसारित हो रहे वीडियो फुटेज की समीक्षा शामिल है। जांच जारी रहने के कारण, अधिकारियों का प्राथमिक ध्यान इस बात पर होगा कि पीड़ित के सुविधा के बाहर होने के दौरान ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों द्वारा कोई प्रक्रियात्मक चूक तो नहीं हुई।
