Genpact अपने हैदराबाद फैसिलिटी में कथित 'टॉक्सिक' वर्क कल्चर और खराब मैनेजमेंट को लेकर विवादों में घिर गई है। एक तरफ कंपनी ने Q2 2026 में **7.1%** की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, वहीं अब निवेशकों की नजर इस विवाद पर टिकी है कि क्या इसका असर कंपनी की ब्रांड वैल्यू और टैलेंट रिटेंशन पर पड़ेगा।
आरोपों की सच्चाई क्या है?
Genpact के हैदराबाद स्थित हफीजपेट फैसिलिटी को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें रोजाना 14 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके अलावा, जेंडर डिस्क्रिमिनेशन और मेडिकल इमरजेंसी के समय सहयोग न मिलने जैसे संगीन आरोप भी लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इन समस्याओं को एचआर (HR) के पास 3 हफ्ते पहले ही उठाया गया था, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
क्या फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर पड़ेगा असर?
फाइनेंशियल फ्रंट पर देखें, तो कंपनी ने हाल ही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। Q2 2026 में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 7.1% रही है और मैनेजमेंट ने 'एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस' डिवीजन के लिए गाइडेंस भी बढ़ाई थी। हालांकि, आईटी और बीपीओ सेक्टर में ह्यूमन कैपिटल ही सबसे बड़ी संपत्ति होती है। ऐसे में खराब वर्क कल्चर के कारण एट्रिशन रेट (Attrition Rate) बढ़ने का खतरा है, जिससे कंपनी की लागत में इजाफा हो सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अभी तक कंपनी की ओर से कोई औपचारिक बयान या एक्सचेंज फाइलिंग नहीं आई है। लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के विवाद कंपनी की लंबी अवधि की साख के लिए चुनौती बन सकते हैं। यदि लेबर कानूनों के तहत जांच शुरू होती है, तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है। आने वाले दिनों में मैनेजमेंट का इस पर क्या रुख रहता है और क्या इसका असर कंपनी के ऑपरेशनल स्टेबिलिटी पर पड़ता है, इस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
