सड़क सुरक्षा और खराब साइनबोर्ड्स को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने NHAI को फटकार लगाई है। सरकार अब कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर सख्त निगरानी और पेनल्टी लागू करने की तैयारी में है, जिससे इंफ्रा सेक्टर के लिए रेगुलेटरी दबाव बढ़ सकता है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को सड़क सुरक्षा और खराब साइनबोर्ड्स के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से घेरा है। मंत्री का मानना है कि स्पष्ट नीतियां होने के बावजूद, हाईवे पर साइनबोर्ड्स की कमी देश में होने वाले सड़क हादसों की एक बड़ी वजह है। भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है, जिसे कम करने के लिए अब सरकार कड़ी निगरानी का रास्ता अपना रही है।
सरकार का कड़ा एक्शन प्लान
सड़कों की गुणवत्ता को रियल-टाइम में मॉनिटर करने के लिए सरकार ने सोशल मीडिया फीडबैक और 'नेटवर्क सर्विलांस व्हीकल्स' का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। अब खराब काम या मेंटेनेंस में कोताही बरतने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसल्टेंट्स को ब्लैकलिस्ट तक किया जा सकता है।
इंफ्रा सेक्टर पर क्या होगा असर?
यह कदम इंफ्रा और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के निवेशकों के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है। जो कंपनियां NHAI के साथ EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्ट्स में शामिल हैं, उनकी कार्यप्रणाली पर अब पहले से कहीं ज्यादा बारीकी से नजर रखी जाएगी। यदि कॉन्ट्रैक्टर्स को सुरक्षा मानकों के लिए जवाबदेह बनाया जाता है, तो इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की टाइमलाइन में देरी हो सकती है।
NHAI खुद तो लिस्टेड नहीं है, लेकिन इसका पूरा इकोसिस्टम बाजार की बड़ी कंपनियों और National Highways Infra Trust (NHIT) जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) से जुड़ा है। ऐसे में इन कंपनियों के मेंटेनेंस खर्च में बढ़ोतरी और कॉन्ट्रैक्टर्स पर होने वाली कार्रवाई सीधे तौर पर इनके एसेट मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकती है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सड़क सुरक्षा के इन नए नियमों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है और इसका असर कंस्ट्रक्शन कंपनियों के मार्जिन पर कितना पड़ेगा।
