Flipkart के हजारों पूर्व कर्मचारी अब लामबंद हो गए हैं। उन्होंने पैरेंट कंपनी Walmart को एक पिटीशन दी है, जिसमें उन्हें भी **$2 अरब** के संभावित शेयर बायबैक प्रोग्राम का हिस्सा बनाने की मांग की गई है। कंपनी के IPO में देरी होने से इनके शेयर ऑप्शंस (ESOPs) फिलहाल फंसे हुए हैं।
क्या है कर्मचारियों का दर्द?
यह मामला तब गरमाया जब 20,000 से 30,000 पूर्व कर्मचारियों ने एक साथ आकर अपनी आवाज बुलंद की। इस ग्रुप में Flipkart के अलावा Myntra, Cleartrip, Shopsy, Super Money और ANS Commerce के पूर्व कर्मचारी भी शामिल हैं। इनका मुख्य दर्द यह है कि कंपनी ने जुलाई 2026 में केवल मौजूदा कर्मचारियों को ही अपने शेयर कैश आउट करने का मौका दिया था, जबकि पूर्व कर्मचारी इससे वंचित रह गए। इस दौरान कंपनी की वैल्यूएशन लगभग $38.2 अरब आंकी गई थी।
IPO में देरी और नकदी का संकट
पूर्व कर्मचारियों की नाराजगी के पीछे सबसे बड़ी वजह IPO में हो रही अनिश्चितता है। हालांकि कंपनी ने अपना कॉर्पोरेट मुख्यालय सिंगापुर से भारत शिफ्ट कर लिया है, जो कि IPO के लिए एक जरूरी कदम माना जाता है, लेकिन अब खबरें हैं कि IPO 2028 तक टल सकता है। Walmart ने Flipkart के लिए EBITDA ब्रेक-ईवन का लक्ष्य रखा है, जिसकी वजह से लिक्विडिटी के लिए इंतजार और लंबा होता दिख रहा है।
आगे क्या होगा?
Flipkart के CEO कल्याण कृष्णमूर्ति का कहना है कि IPO की टाइमलाइन सिर्फ मैनेजमेंट के हाथ में नहीं है। वर्तमान में इन पूर्व कर्मचारियों के लिए ये शेयर ऑप्शंस सिर्फ कागजों पर ही हैं, क्योंकि इन्हें किसी पब्लिक एक्सचेंज पर बेचा नहीं जा सकता। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या Walmart अपनी पॉलिसी में बदलाव कर पूर्व कर्मचारियों के लिए कोई खास प्रावधान करेगा, या फिर वह केवल वर्तमान कर्मचारियों को ही प्राथमिकता देना जारी रखेगा।
