Cholamandalam पूर्व एग्जीक्यूटिव का दर्द! स्टार्टअप फेल होने के बाद बने कैब ड्राइवर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Cholamandalam पूर्व एग्जीक्यूटिव का दर्द! स्टार्टअप फेल होने के बाद बने कैब ड्राइवर

बेंगलुरु से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां 20 साल के अनुभव वाले Cholamandalam Insurance के एक पूर्वनल ज़ोनल हेड (Zonal Head) स्टार्टअप बंद होने के बाद अब कैब चला रहे हैं। यह कहानी भारत में अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए बढ़ती हायरिंग चुनौतियों को उजागर करती है।

20 साल का अनुभव, अब कैब चलाने को मजबूर

यह मामला बेंगलुरु से सामने आया है, जहां एक सीनियर प्रोफेशनल, जिसने Cholamandalam Insurance कंपनी में 20 साल से ज़्यादा समय बिताया, अब कैब चला रहा है। यह तब हुआ जब उसने एक स्टार्टअप जॉइन किया था, लेकिन फंड की कमी के चलते वह स्टार्टअप चार महीने में ही बंद हो गया।

कैसे हुआ खुलासा?

Rafiqa Arzuman नाम की एक टैलेंट पार्टनर ने अपने कैब राइड के दौरान इस एग्जीक्यूटिव से बात की। उन्होंने पाया कि ड्राइवर फर्राटेदार इंग्लिश बोलता है और उसके पास कॉर्पोरेट दुनिया का गहरा अनुभव है। परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, उसे तुरंत कमाई का ज़रिया चुनना पड़ा, भले ही वह उसकी योग्यता से काफी कम हो।

'अनुभव की कीमत' पर बहस

इस कहानी ने प्रोफेशनल नेटवर्क्स में खलबली मचा दी है और कॉर्पोरेट हायरिंग में 'अनुभव की कीमत' को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां अक्सर 'अनुभवी' लोगों को हाई-कॉस्ट लायबिलिटी मानती हैं। उन्हें लगता है कि ज़्यादा अनुभव वाले कर्मचारी की सैलरी ज़्यादा होगी, जिस वजह से वे उन्हें कम अनुभवी और सस्ते कैंडिडेट्स के मुकाबले ज़्यादा जोखिम भरा मानते हैं।

स्टार्टअप इकोसिस्टम का रिस्क

खासकर स्टार्टअप्स के अस्थिर माहौल ने अनुभवी लोगों के लिए जोखिम को और बढ़ा दिया है। हाल के वर्षों में, फंडिंग कम होने से कई अर्ली-स्टेज कंपनियां बंद हो गई हैं। ऐसे में, जो सीनियर प्रोफेशनल्स एक स्टेबल कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर इन हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड मौकों में आए थे, वे खुद को मुश्किल स्थिति में पाते हैं।

आगे क्या?

यह घटना जॉब मार्केट के लिए एक रिमाइंडर है कि गहरा अनुभव रखने वाले टैलेंट की हमेशा कद्र होनी चाहिए, भले ही वे हर स्टार्टअप या कंपनी के मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर में फिट न बैठें। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कॉर्पोरेट सेक्टर कैसे अनुभवी टैलेंट और मौजूदा ज़रूरतों के बीच के गैप को भरता है, ताकि सालों की मेहनत को सिर्फ बजट का हिस्सा नहीं, बल्कि ग्रोथ का इंजन माना जाए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.